जयप्रकाश नगर। जिले के अधिकतर गांवों में आर्सेनिक का असर है। इससे ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा। वर्षों पहले कई गांवों में तो आर्सेनिक रिमूवल प्लांट भी स्थापित किए गए। लेकिन यह कवायद समय के साथ धीमी पड़ गई। लोग आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश हैं। आर्सेनिकयुक्त पानी से कपड़े तक पीले हो जा रहे हैं।
सरकार की ओर से आर्सेनिक मुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर तमाम तरह की योजनाओं को संचालित किया गया। फिर भी विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के लक्ष्मण छपरा गांव की करीब 22 हजार की आबादी आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश है। चिकित्सकों के अनुसार आर्सेनिकयुक्त पानी स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। इसका असर फेफड़ों, गुर्दा के अलावा त्वचा पर भी पड़ता है। गांव के लल्लन तिवारी, रणधीर सिंह नन्हे, काशी नाथ पांडेय, राधेश्याम यादव, रविन्द्र सिंह, राकेश सिंह, मृत्युंजय सिंह ने बताया कि करीब दो दशक पहले गांव के लोगों को आर्सेनिकयुक्त पानी से मुक्ति दिलवाने के लिए टोला फकरु राय के गांव स्थित बनी पानी टंकी से संबद्ध करने का निर्देश दिया गया लेकिन आज तक यह कार्य नहीं हो सका। गांव में शुद्ध पेयजल का इंतजाम नहीं हो सका। इससे ग्रामीण आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश हैं। कहा कि इसके चलते ग्रामीणों को आए दिन पेट के रोगों के साथ त्वचा की बीमारी का भी सामना करना पड़ता है।