जेल से रिहाई के बाद बलिया में जगह-जगह पत्रकारों का स्वागत
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तीनों पत्रकारों ने बलिया प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी खामियों को छिपाने के लिए हमेें फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेज दिया गया। तीनों पत्रकारों ने बलिया के डीएम व एसपी की भूमिका संदिग्ध बताते हुए सवाल खड़े किए। कहा कि इस दौरान बलिया, आजमगढ़ समेत पूर्वांचल व प्रदेश के पत्रकारों, व्यापारी वर्ग और आम जनता का सहयोग रहा।
जेल में 28 दिन कैसे बीते यह हमें और हमारे घर वालों को ही पता है। पत्रकारों ने कहा कि हम लोगों ने जिला प्रशासन को पेपर लीक सूचना दी और प्रशासन ने आरोपियों को पकड़ने के बजाय सूचना देने वालों को ही आरोपी बना दिया। जेल से रिहा पत्रकारों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
बताया कि जिस दिन जेल में लाया गया था, उस दिन एसओजी व पुलिस ने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। उनका व्यवहार ऐसा था जैसे हम कोई बड़े अपराधी हैं और बड़ी घटना को अंजाम देकर आए हों। उनका रवैया हमारे प्रति ठीक नहीं था। इतना ही नहीं दबाव बनाते हुए हमारे सूत्रों को भी पूछा गया जो कानूनी रूप से गलत है। जबकि नियम है कि सूत्र बताने का हम पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है।
पत्रकारों ने कहा कि यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले ही बलिया में बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं व प्रश्नपत्र बिक रहे थे। पूरी सूचना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही थी। इसके बाद भी बलिया के डीएम और एसपी लगातार अपनी खामियों को छिपाने में लगे रहे। अखबार में खबर प्रकाशित हुई तो प्रशासन ने पत्रकारों का दमन करते हुए मामले को दबाने का प्रयास किया।