उन्होंने बताया कि पूर्वजों के अनुसार अंग्रेजों ने वादा किया था कि परिवार को महल में रखा जाएगा तथा सोने की थाली में भोजन परोसा जाएगा लेकिन सूरीनाम में मजदूरी करवाई गई। इसके बाद उन लोगों को अंग्रेजों ने नीदरलैंड भेज दिया।
डिफ्ट साउथ हॉलैंड में मेंबर ऑफ सुपरवाइजिंग बोर्ड पद पर कार्यरत हैं जितेंद्र
जितेंद्र छत्ता डिफ्ट साउथ हॉलैंड में मेंबर ऑफ सुपरवाइजिंग बोर्ड पद पर कार्यरत हैं। जितेंद्र ने बताया कि नीदरलैंड में पूर्वज सुंदर की सात साल बाद मौत हो गई, उसके एक साल बाद उनकी पत्नी भी गुजर गईं। सिर्फ उनका बेटा बचा था, जिनके संघर्ष से हम वशंज इस मुकाम पर पहुंचे। सुंदर के बेटे का नाम दुखी था। उनके बेटे कल्याण, फिर पृथ्वीराज और उसके बाद धर्मराज ने वंश को आगे बढ़ाया। जितेंद्र की पुत्री ऐश्वर्या ने बताया कि पहली बार भारत आई हूं। बहुत खुशी हो रही है। हमारे घर में राम की पूजा होती है। अयोध्या में रामलला के दर्शन से जीवन धन्य हो गया।