बलिया। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत गांवों में अमृत सरोवर के निर्माण को लेकर शासन का निर्देश है। इसको लेकर विभागीय अधिकारी कवायद में जुटे हैं। अधिकारियों की मानें तो जिले में आठ अमृत सरोवर निर्माण को लेकर के स्थलीय सत्यापन का कार्य किया जा रहा है।
जल संरक्षण और आम जन की सहूलियत के लिए 75 तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जाएगा। एक सरोवर के विकास पर करीब 50 लाख का खर्च आएगा। अमृत सरोवर के पास सामुदायिक भवन, शौचालय और साफ पानी की व्यवस्था होगी। यही नहीं, मोटरबोट की भी सुविधा दी जाएगी। जल संरक्षण की पहल वैसे तो सालों से शुरू है, लेकिन एक से डेढ़ दशक से काम में तेजी आई है। जिले में छोटे और बड़े कुल 5840 तालाब हैं। इनमें 800 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। कई तालाब अतिक्रमण के शिकार होकर अस्तित्व भी खो चुके हैं। अब शासन ने एक एकड़ क्षेत्रफल में फैले तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। जिले में ऐसे 75 तालाबों को चिह्नित किया गया है। सबसे पहले तालाब की खोदाई होगी और उसके चारों तरफ चबूतरा बनाया जाएगा। एक ऐसा हॉल बनाया जाएगा, जहां गांव के लोग शादी भी कर सकते हैं। एक सरोवर के निर्माण पर करीब 50 लाख खर्च आएगा। इसमें हॉल, सामुदायिक शौचालय संग अन्य व्यवस्थाएं शामिल रहेंगी। इस पर मनरेगा, वित्त आयोग व अन्य मद की रकम शामिल होगी।
मानक के आधार पर कुल 75 गांवों में अमृत सरोवर के रुप में तालाबों केे विकसित करने के लिए चिह्नित किया गया है। कुछ स्थानों पर कार्य भी शुरु हो चुका है।
- हरिश्चंद्र प्रजापति, उपायुक्त, मनरेगा एवं श्रम रोजगार, बलिया।