बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षा माफिया का बोलबाला है। आलम यह है कि नकल के लिए मनमाने तरीके से परीक्षार्थी धन की वसूली कर रहे हैं। इसकी शिकायत बार-बार परीक्षा कंट्रोल को परीक्षार्थियों द्वारा दी जा रही है। लेकिन जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। उधर, सोमवार को जिला प्रशासन ने अति संवेदनशील 70 परीक्षा केंद्रों पर स्ट्रेटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी है।
जिला प्रशासन द्वारा यूपी बोर्ड परीक्षा को नकल विहीन कराने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। पहले दिन ही जिला प्रशासन पूरी तरह से लापरवाह दिखा। जैसे-तैसे यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू हुई। आलम यह रहा कि कहीं कक्ष निरीक्षक नदारद रहे तो कहीं केंद्र व्यवस्थापक। जिससे नकलविहीन परीक्षा कराने की व्यवस्था तार-तार होती रही। मीडिया के काफी हो-हल्ला करने के बाद जिला प्रशासन की नींद खुली और अति संवेदनशील 70 केंद्रों पर स्ट्रेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई।
21 फरवरी को राजकीय इंटर कालेज में बने परीक्षा कंट्रोल को विभिन्न केंद्रों के तीन परीक्षार्थियों ने फोन करके नकल कराने के लिए दो से तन हजार रुपये वसूली का आरोप लगाया। लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक संबंधित कालेजों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। डीआईओएस शिवचंद राम ने कहा कि परीक्षा कंट्रोल को नकल कराने के लिए पैसा मांगने की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। शिकायत वाले केंद्रों पर स्पेशल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जरूरत पड़ी तो इस तरह की शिकायतों की जांच भी कराई जाएगी। उधर, डीआईओएस ने बताया कि जिले के समस्त यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक पूरक प्रशभन पत्रों की मांग निर्धारित प्रारूप पर राजकीय इंटर कालेज स्थित कंट्रोल रूम को हर हाल में तत्काल उपलब्ध करा दें। ताकि समय से पूरक प्रशभनपत्रों को मंगाया जा सके।