बलिया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में मच्छरों से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। नगर निकाय चुनाव के ऐन पहले मच्छर मार दवाओं का छिड़काव निकायों ने नहीं कराया बल्कि बजट का रोना रोकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
आमतौर पर दीपावली के दिन जलने वाले दीये से बरसाती कीटों के नष्ट हो जाने की मान्यता है। अब दीपावली बीत चुकी है और बरसाती कीटों में कमी भी आ गई है लेकिन मच्छरों का आतंक ज्यों का त्यों बरकरार है। खासकर नगरीय इलाकों में मच्छरों का प्रकोप सबसे अधिक है। नगरीय इलाकों में मच्छरों का प्रकोप कम करने के लिए समय-समय पर छिड़काव करने का प्रावधान है लेकिन संबंधित नगरपालिका व नगर पंचायत प्रशासन केवल कोरम कर कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। आलम यह है कि जनपद मुख्यालय के विभिन्न मुहल्लों में कचरों का अम्बार है और इसके चलते मच्छरों ंका प्रकोप भी अधिक है लेकिन नपा प्रशासन की ओर से इन मुहल्लों की सुधि नहीं ली गई। वर्तमान में निकाय चुनाव की घोषण कभी भी राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से की जा सकती है लेकिन इसके बावजूद निकायों की ओर से नगरीय इलाकों में कोई छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। बताया जाता है कि मच्छरों के प्रकोप से आए दिन लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार भी होते हैं लेकिन इसके बावजूद भी नपा प्रशासन मौन धारण किए रहता है। नपा के ईओ की मानें तो शहर में छिड़काव के लिए कोई बजट नहीं मिलता है बल्कि अन्य मद से ही हर साल करीब तीन लाख रूपये तक का प्रावधान किया जाता है। बताया कि इसी बजट में दवा खरीद, डीजल आदि का खर्च होता है। कहा कि एक लीटर दवा के लिए 19 लीटर डीजल की आवश्यकता होती है जो काफी खर्चीला होता है। फिलहाल बजट काफी कम है लेकिन फिर भी जरुरत पडने पर छिड़काव कराया जाएगा।
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उन्होंने एक सप्ताह पहले ही कार्यभार लिया है। छिड़काव के लिए बजट काफी सीमित है लेकिन मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए समय-समय पर छिड़काव कराया जाएगा।
केके सोनकर
ईओ, नगरपालिका, बलिया।