माडल रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद बस में बैठने जाते प्रवासी श्रमिक।
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बलिया। गुजरात और मुंबई से आई दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से जिले में कुल 3170 कामगार पहुंचे। मजदूरों ने आरोप लगाया कि कंपनी मालिक न दो पगार दे रहे थे और न ही घर जाने दे रहे थे। आपदा और विपत्ति की इस घड़ी में मजदूरों से किराया भी लिया गया।
बलिया मॉडल रेलवे स्टेशन पर दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 3170 श्रमिक बलिया पहुंच गए। गुजरात के भरूच से रविवार की देर रात करीब 1.37 बजे बलिया आई ट्रेन में 1549 और मुंबई के बोरीवली से सोमवार की भोर में करीब 4.40 बजे आई ट्रेन में 1621 श्रमिक सवार रहे। इन्हें सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराते हुए बोगियों से उतारा गया। इसके बाद मेडिकल टीम ने सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की। इसके बाद लंच पैकेट व बोतल बंद पानी के साथ सभी श्रमिकों को रोडवेज बस से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। गुजरात के भरूच से बलिया पहुंचे श्रमिकों ने बताया कि टिकट का पैसा लिया गया।
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- भरुच में काम बंद होने के बाद कंपनी मालिक ने पगार बंद कर दिया, घर नहीं आने दे रहा था। भोजन की समस्या पैदा हो गई थी। हम किसी तरह से मालिक की चंगुल से मुक्त होकर रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां से 670 रुपये किराया देकर बलिया पहुंचे हैं।-कमरुद्दीन अंसारी, मिर्जापुर
- लॉकडाउन के दौरान भोजन की समस्या पैदा हो गई। कंपनी मालिक ने भी मदद नहीं की। उसने पगार देने से भी मना कर दिया। वह किसी भी दशा में घर भेजने को तैयार नहीं था। काफी विरोध के बाद वह वहां से निकल सका।- रमेश कुमार, सोनभद्र
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- गुजरात में लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मजदूरों को भोजन का संकट है। मजदूरों को मुफ्त घर पहुंचाने की सरकार की घोषणा हवा-हवाई साबित हुईै। घर भेजने के लिए किराया वसूला जा रहा है।-उदय प्रकाश, सोनभद्र
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- मजदूरों को घर वापसी के लिए सरकार मदद नहीं कर रही है। सरकार ने श्रमिकों को मुफ्त घर भेजने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। जिस तरह समस्या झेला, उससे फिर कभी गुजरात नहीं जाएंगे।-गणेश, सोनभद्र