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धड़ल्ले से संचालित हो रही अवैध आरा मशीनें

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बलिया। जिले में अवैध तरीके से जगह-जगह आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है। दो दशक पहले महज 95 लाइसेंस ही बने थे लेकिन अधिकांश निर्धारित स्थानों पर संचालित नहीं है। वन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से गोरखधंधा जारी है।
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जिले में सालों से अवैध तरीके से प्रमुख चट्टी-चौराहे व गांवों में वन विभाग व पुलिस की मिलीभगत से आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है। इन मशीनों पर अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों की चिराई आदि का काम किया जाता है। कभी कभार वन विभाग की ओर से अवैध आरा मशीन संचालकों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है और सीज किया जाता है लेकिन कुछ दिनों बाद यह धंधा फिर शुरू हो जाता है। बताया जाता है कि जिले में वर्ष 1981 से 1996 के बीच कुल 95 आरा मशीनों के लाइसेंस जारी किए गए। वर्ष 1997 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आरा मशीनों के लाइसेंस जारी करने व नवीनीकरण पर रोक लगा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कोई भी लाइसेंस अन्यत्र हस्तांतरित भी नहीं किए जा सकते हैं। इसके चलते करीब दो दशक तक जिले में वन विभाग की ओर से कोई भी नया आरा मशीन का लाइसेंस जारी नहीं किया गया। हालांकि वर्तमान में इसमें कुछ राहत मिली है। वन विभाग के डीएफओ की मानें तो नया लाइसेंस जारी किए जाने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। आलम यह है कि अभी जनपद में केवल दो दशक पहले के ही बने आरा मशीनों के लाइसेंस प्रचलन में हैं लेकिन इसके विपरीत जिले में दर्जनों आरा मशीनों का संचालन किया जाता है। इस बीच कोर्ट की ओर से बीच के सालों में पांच हार्सपावर तक से संचालित होने वाले छोटे आरा मशीनों के लगाने की छूट थी लेकिन वर्तमान में इस पर रोक लगी है। लेकिन वन विभाग व पुलिस की मिलीभगत से जिले में दर्जनों स्थानों पर अवैध तरीके से आरा मशीनों का संचालन किया जाता है।
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जिले में बहुत पहले के जारी कुल 95 आरा मशीनों के लाइसेंस चलन में हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण बीच के सालों में न कोई नया लाइसेंस जारी किया गया और न कोई हस्तांतरण ही किया गया। कुछ लाइसेंस हस्तांतरित किए गए हैं। अवैध आरा मशीनों के संचालन को लेकर समय-समय पर छापेमारी कर कार्रवाई की जाती है। - एनके सिंह, डीएफओ, बलिया
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