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विश्व संगीत दिवस पर स्वर लहरियों से गूंज उठी भृगु नगरी

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बलिया। प्यार नहीं है स्वर में जिसको, वह मानव इंसान नहीं..., छोड़ देतअ गांजा-दारू मान लेतअ कहना बलमुआ हो करत दूध के उठवना...विश्व संगीत दिवस के मौके पर बुधवार की देरशाम संगीत कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर न सिर्फ शाम को रंगीन बनाया। बल्कि स्वर लहरों की गूंज टीडी कालेज से दूर-दूर तक जाकर लोगों का मन मोह रहा था। इस दौरान संगीत एक-शाम को संगीत प्रेमियों की भारी भीड़ ने चार चांद लगा दिया।
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कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान संघ के मंडल अध्यक्ष विमल पाठक ने बतौर मुख्य अतिथि मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ नवोदित कलाकार रंजना, स्नेहा , आलोक और नीरज निश्चल ने जब सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तो महफिल धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा। इसके बाद प्यार नहीं है स्वर में जिसको, वह मानव इंसान नहीं.... प्रसिद्ध लोकगीत गायक रजनीकांत कुशवाहा ने तो गायक कृष्णा हमदर्दी ने छोड़ देतअ गांजा-दारू मान लेतअ कहना बलमुआ हो करत दूध के उठवना....सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया। वहीं अरविंद उपाध्याय एवं कुमारी पूजा एवं स्नेहा ने संयुक्त रूप से मेरे ढोलना सुन....मेरे प्यार की धुन..गाने पर जब ड्वीट सांग और नृत्य प्रस्तुत किया तो उपस्थित जनता मंत्रमुग्ध हो गए। इसी क्रम में वाराणसी घराने के ऋषभ तिवारी ने कत्थक नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम में आशुतोष सिंह, मनोज राय, अमित शुक्ल, जीतेश जीगर, आस्था दूबे, सागर सांवरिया, राजा बाबू, आशीष, सोनी, प्रदुमभन ने भी अपने-अपने मनमोहक प्रस्तुति अपने गीतों के माध्यम से की। इस दौरान म्यूजिक प्लानेट के सचिव अरविंद उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं कलाकारों को स्मृति चिह्न से सम्मानित किया। इस मौके पर प्रधान बिट्टू मिश्र, मोहन दूबे, शमीम अंसारी, गीतकार बब्बन विद्यार्थी, अरूण कुमार मिश्र, विष्णु मालवीय, कामेश्वर राय, अनीता शर्मा, जेपी तिवारी, संपूर्णानंद दूबे आदि मौजूद रहे। संचालन साहित्यकार भोला प्रसाद आगभनेय ने किया। अंत में अतिथियों का आभार अरविंद उपाध्याय एवं कृष्णा हमदर्दी ने जताया।
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