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बेटा एक तो बेटी दो कुलों की करती है उद्घार: सत्येंद्र

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रतसर। क्षेत्र के सिकरिया गांव स्थित चोगड़ा-रतसर मार्ग स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा में आयोजित प्रतिष्ठात्मक श्री विष्णु महायज्ञ के छठवें दिन बुधवार को राम जानकी की मूर्ति का घृतावास विधि विधान से पूजन-अर्चन किया गया। महायज्ञ में हवन के पश्चात रामलीला और रासलीला हुई। संत सतेंद्र जी महाराज ने संगीतमय रामकथा में श्रीराम विवाह की कथा सुनाई। कहा कि बेटा एक तो बेटी दो कुलों का उद्धार करती है।
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कहा कि वगैर अगुआ के हुआ विवाह सफल नहीं होता। जिस विवाह से जगत का कल्याण होता है वहीं विवाह सफल होता है। रामचंद्र और सीता का विवाह जगत के कल्याण के लिए हुआ था। उन्होंने कथा के क्रम में बताया कि बेटी शरीर का हृदय होती है बेटी के बिना घर सूना होता है। पुत्र तो एक कुल का उद्धार करता है लेकिन बेटी दो कुलों का उद्धार करती है। मनुष्य अपने जीवन में श्री राम के आदर्शों को धारणा कर अलौकिक ऊर्जा एवं आनंद की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा से तथा संत के जीवन में आ जाने से भगवत कृपा मिलती है।
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