नरहीं। कभी विद्या का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय आज व्यापारिक प्रतिष्ठान के रूप में तब्दील हो चुके हैं। आए दिन कई मदों में छात्रों से पैसा वसूल किया जा रहा है। इसका असर अभिभावकों के जेब पर पड़ रहा है।
लाख प्रयास के बावजूद प्राइवेट स्कलों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। इन विद्यालयों में अभिभावकों से हर वर्ष दाखिला के नाम पर शुल्क की वसूली की जाती है। इसके अलावा स्कूलों से कापी, किताब, ड्रेस समेत अन्य सामान भी दिए जाते हैं और इसके एवज में धनउगाही किया जाता है। जबकि सरकार बार-बार स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की बात कह रही है फिर भी इस पर कोई अमल नहीं हो रहा है। हालत यह है कि प्राइवेट विद्यालय छात्रों की सुविधा के लिए अपने यहां वाहन सुविधा उपलब्ध कराने का दावा कर छात्रों से मोटी रकम की वसूल रहे हैं। लेकिन पैसा देने के बाद अधिकांश बच्चे को वाहनों में सीट नहीं मिलती। कई वाहन तो मानक के विपरीत संचालित किए जाते हैं और अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। कई वाहनों के तो खिड़कियों में जाली तक नहीं होती है।