बलीपुर कांड ने क्षेत्र के हजारों लोगों का सुख चैन छीन लिया है। 21 दिनों से खाकी और सीबीआई के डर से लोग सहमे हैं। गांव में होली के त्यौहार जैसा कोई नजारा नहीं दिख रहा। कहीं भी होलिका नहीं लगाई गई है। 27 मार्च को इस महापर्व पर लोग एक दूसरे से गले नही मिल पाएंगे।
दो मार्च की शाम हुए तिहरे हत्याकांड के बाद लगभग पांच हजार की आबादी वाला बलीपुर गांव पूरी तरह से खाली है। 27 मार्च को होली है। हर साल होली से काफी पहले तैयारियां शुरू हो जाती थीं। महिलाएं एवं युवाओं की टोलियां अल्हड़ गीतों पर झूमती रहती थी।
लेकिन इस बार गांव में सन्नाटा पसरा है। दुकानदारों का धंधा खराब हो रहा है। सीबीआई की धमक से दहले लोग घर लौटने को तैयार नहीं है। घर में मौजूद महिलाएं, बच्चे भी त्यौहार को लेकर सशंकित हैं। हमेशा गुलजार रहने वाली बलीपुर चौराहे की दुकानों पर ताला लटक रहा है।
गांव की राजकली, विमला, देवरहिन समेत कई महिलाओं ने कहा कि जब से कांड हुआ है। हम लोग कुछ काम नहीं कर पा रहे हैं। परिजन डर के मारे गांव नहीं आ रहे हैं। सीबीआई के लोग कब किसको बुला लें, किसको केस में फंसा दे, इसका डर सता रहा है। इस बार होली नहीं मना पाएंगे।
बलीपुर कांड की दहक सर्किल के सभी थाना क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है। ग्रामीण सशंकित होकर होलिका में लकड़ी आदि डाल रहे हैं, लेकिन रौनक नहीं दिख रही है। प्रशासन भी गांवों में अपनी पूरी नजर गड़ाए हुए हैं। लगातार ग्रामीणों को चेतावनी दी जा रही है जिससे लोग सहमे हुए हैं।