बहराइच मेडिकल कालेज में दवा वितरण काउंटर पर लगी भीड़।
बहराइच। गरीब मरीजों को एक रुपये के परचे पर बेहतर इलाज देने के लिए खुला मेडिकल काॅलेज अब कमीशन के जाल में फंसता जा रहा है। प्रतिदिन मेडिकल काॅलेज आने वाले 2,000 से 2,200 मरीजों में से अधिकांश को बेहतर फायदे का जुमला बताकर बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों पर भेजा जा रहा है। जो कि कहीं न कहीं शासन से आने वालीं दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान है।
मेडिकल काॅलेज में ऐसा तब है जब 362 प्रकार की दवाओं के मौजूद होने का दावा किया जाता है। कमीशनखोरी के इस गठजोड़ के खिलाफ न तो जिला प्रशासन और न ही मेडिकल प्रशासन कोई कड़ा कदम उठा रहा है। जिससे गरीब मरीजों पर इलाज के लिए कर्ज तक की नौबत आ रही है।
केस - 1
हरिहरपुर रैकवारी से महिला देवी का इलाज करवाने आए मस्तराम ने बताया कि देवी को पेट में दर्द हो रहा है। चिकित्सक को दिखाया है, कुछ ही दवा अंदर से मिली हैं। जल्दी फायदा होने की बात कहकर कुछ दवाएं बाहर की लिखी गई हैं।
केस - 2
फखरपुर निवासी मोहम्मद आलम ने बताया कि उनके शरीर पर छाले निकल आए हैं। चिकित्सक की दिखाया है, तो कई दवाएं बाहर की लिख दी गईं हैं। आलम ने कहा कि मेडिकल काॅलेज से अच्छा जिला अस्पताल था। सभी सुविधाएं मिल रही थीं।
केस - 3
बीबीयापारा निवासी रणजीत ने बताया कि हाथ की नस दब गई थी। उसी के इलाज के लिए आए थे, दो दवाएं बाहर से लेने को कहा गया है। वो अंदर नहीं मिली हैं।
मेडिकल काॅलेज के चिकित्सक काॅलेज में मौजूद 362 दवाएं ही लिख रहे है। जरूरी होने पर अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखी जाती हैं। अगर मरीज मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदता है तो ये उसकी जिम्मेदारी है।
- डॉ. अरविंद शुक्ला, मीडिया प्रभारी