बहराइच। माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग ने एक नया फरमान जारी किया है जिसक तहत अब पीजीटी अभ्यर्थियों के लिए परास्नातक के साथ बीएड की डिग्री अनिवार्य कर दिया है। इस नए फरमान से केवल परास्नातक अभ्यर्थियों में खलबली मच गई है। बीएड का पाठ्यक्रम दो साल का होने के कारण अब केवल परास्नातक डिग्री धारियों को दो साल तक आवेदन पत्र भरने से वंचित रहना होगा।
जिले के सैकड़ों अभ्यर्थी टीजीटी और पीजीटी परीक्षा का इंतजार कर रहे थे। इस बीच एक नया फरमान आया कि अब पीजीटी अभ्यर्थियों को भी बीएड की डिग्री हासिल करनी होगी तभी वह इस पद के लिए अर्ह होंगे। राजकीय इंटर कॉलेज में निकले प्रवक्ता पदों के लिए यह अनिवार्यता निर्धारित की गई है। इस नए फरमान से जो अभ्यर्थी परास्नातक की उपाधि हासिल कर टीजीटी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे उनको जोर का झटका लगा है। अब बीएड की डिग्री हासिल करने में दो साल लगेंगे।
क्या कहते हैं अभ्यथी
इस बारे में पीजीटी की तैयारी कर रहीं कृति ने बताया कि उन्होंने वनस्पति विज्ञान से एमएससी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद पीजीटी की तैयारी शुरू की थी। अब नए आदेश से उन्हें दो साल और इंतजार करना पड़ेगा। भौतिक विज्ञान से एमएससी डिग्रीधारी मृदुल बताते हैं कि उन्होंने टीजीटी परीक्षा के उद्देश्य से उन्होंने बीएड की पढ़ाई पूरी की है। अब पीजीटी में भी इसकी अनिवार्यता हो जाने से वह पीजीटी के लिए भी अर्ह हो गए हैं। इसी प्रकार नितीश कुमार, पूजा मिश्रा तथा प्रतिभा सिंह इस नए आदेश से परेशान हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें बीएड की डिग्री हासिल करने तक दो साल इंतजार करना पड़ेगा।
तो क्या ये बीएड का अस्तित्व बचाने की कोशिश है
पिछले दिनों प्राथमिक शिक्षक के लिए बीएड की डिग्री को अनर्ह घोषित करने से जिले के बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेशार्थियों की संख्या तेजी से घटी थी। इन काॅलेजों में सीटों का भरना मुश्किल हो रहा था। यदि यही स्थिति रहती तो दो से तीन साल में बीएड का अस्तित्व समाप्त हो जाता। इन हालातों में पीजीटी में अनिवार्यता होने से बीएड प्रवेशार्थियों की संख्या बढ़ सकती है।