मेडिकल कॉलेज में घायलों का ओटी में जमीन पर लिटाकर किया जा रहा मरीजों का इलाज।
बहराइच। मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण के समय दावे किए गए थे कि अब गंभीर रूप से घायलों तथा बीमारों को इलाज के लिए लंबी दूरी नहीं तय करनी होगी। मेडिकल कॉलेज में ही दिल्ली व लखनऊ जैसे इलाज की सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन मंगलवार को हुए हादसे ने इन दावों की पोल खोल दी। हादसे के बाद घायलों को यहां लाया गया तो सभी को स्ट्रेचर, बेड व ऑक्सीजन मुहैया कराने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पसीने छूट गए। ढाई घंटे के अंदर ही सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ के ट्राॅमा सेंटर रेफर कर दिया गया, जबकि यहां सभी विभागों में प्रोफेसर तैनात हैं।
कहने को तो जिले में मेडिकल कॉलेज है। यहां उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए प्रति वर्ष अरबों रुपये का बजट मिलता है। यही नहीं सभी विभागों में प्रोफेसर के साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर भी तैनात हैं, लेकिन एक हादसे ने पूरे मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था की पोल खोल दी। एक के बाद एक यहां 14 घायल पहुंचे तो न तो स्ट्रेचर ढूंढे मिल रहा था न पर्याप्त मात्रा में बेड ही खाली मिल रहे थे। माइनर ओटी के फर्श पर लिटाकर घायलों का इलाज किया जा रहा था, जबकि सबकी सांस उखड़ रही थी और देखने से ही लग रहा था कि उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत है। पूरा माहौल ऐसा था कि चिकित्सक ही नहीं पूरा मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस तरह के हादसे से निपटने को तैयार नहीं था।