जितेंद्र दीक्षित/कासिम मेंहदी
बहराइच। मेडिकल कॉलेज में दोपहर लगभग 12:55 बजे तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी समय एक लोडर दो शवों और दो घायलों को लादकर पहुंचा। देखते ही देखते पूरे परिसर में अफरातफरी मच गई।
खुले लोडर पर दहाड़ मारकर रो रही महिला व शवों को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। सभी लोग घटना को समझने का प्रयास कर ही रहे थे कि पूरा मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस के सायरन से गूंज उठा। एक के बाद एक एंबुलेंस शवों और घायलों को लेकर पहुंचने लगीं। मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी एक घायल को ले जाते, तभी दूसरा पहुंच जाता।
कुछ ही समय में इमरजेंसी खचाखच भर गई। माइनर ओटी हो या फिर वार्ड सभी फुल हो गए। कुल पांच शवों और 12 घायलों के पहुंचने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। भीड़ नियंत्रण में पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ी।
नहीं मिला स्ट्रेचर तो गोद में उठा कर भागे
बहराइच-गोंडा मार्ग पर भीषण सड़क हादसे के बाद मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था भी देखने को मिली। सबसे ज्यादा अव्यवस्था स्ट्रेचर को लेकर दिखी। सिर्फ दो स्ट्रेचरों पर ही घायलों को लाते व ले जाते देखा गया। ऐसे में कराहते घायलों को उनके परिजन गोद में उठा कर भागते दिखे। पुलिसकर्मियों ने भी घायलों को हाथ में उठा कर अंदर पहुंचाया।
माइनर ओटी में फर्श पर पड़े कराहते दिखे घायल
स्लीपर बस की टक्कर से ऑटो सवार पांच लोगोंं की मौत व 15 के घायल होने के बाद मेडिकल कॉलेज का मंजर भी भयावह दिखा। बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने पर इमरजेंसी के माइनर ओटी में जगह कम पड़ गई और कई घायल फर्श पर पड़े कराहते रहे। यह दृश्य देखकर लोगों की आंखें भर आईं। मुश्किल हालात में डाॅक्टर उपचार में जुटे रहे।
ओटी फुल, स्ट्रेचर पर हुआ इलाज
शवों के साथ ही 12 घायलों के पहुंचने से इमरजेंसी में जगह की कमी हो गई। माइनर ओटी घायलों से भर जाने पर चिकित्सकों को ओटी के बाहर स्ट्रेचर पर ही इलाज करते देखा गया। वहीं दो कर्मियों को स्ट्रेचर पर घायलों को लाद-लाद कर वार्ड की दौड़ लगाते देखा गया।
भीड़ में अपनों को खोजते रहे लोग
भीषण हादसे की जानकारी होने के बाद मृतकों व घायलों के परिजन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां जुटी भारी भीड़ के बीच सभी एक दूसरे को अपने स्वजन का नाम बताकर कुशलक्षेम जानने का प्रयास करते दिखे। इस दौरान जिसे स्वजन की मौत की सूचना मिली वह फूट-फूट कर रोने लगा।
भीड़ नियंत्रण के लिए लगानी पड़ी तीन थानों की पुलिस
मेडिकल कॉलेज में अचानक पहुंची 1000 से अधिक की भीड़ से अफरातफरी का माहौल हो गया। चीख-पुकार के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। इसकी जानकारी होने पर एएसपी नगर रामानंद कुशवाहा तीन थानों दरगाह, कोतवाली देहात व कोतवाली नगर की टीम के साथ पहुंचे और स्थिति को संभाला। ओटी, वार्ड व इमरजेंसी में घुसी भीड़ को बाहर किया गया।
आरआरएफ ने रस्सा बांध कर निकलवाई एंबुलेंस
मेडिकल कॉलेज पहुंचे हादसे के गंभीर घायलों को प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सकों ने ट्राॅमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया, लेकिन बाहर मौजूद भीड़ के चलते एंबुलेंस निकालने में समस्या होने लगी। इस पर आरआरएफ के जवानों ने दोनों तरफ रस्सा बांध कर एंबुलेंस को निकलवाया।
बिलखते तीमारदार को डीएम ने दी सांत्वना
हादसे की सूचना पर डीएम मोनिका रानी ने एसपी रामनयन सिंह, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय खत्री के साथ इमरजेंसी का निरीक्षण किया। इस दौरान वार्ड में घायलों के परिजनों से बातचीत के दौरान एक तीमारदार बिलख पड़ा। इस पर डीएम ने उसे ढांढस बंधाया और शासन-प्रशासन के उसके साथ खड़े होने की बात कही।
भतीजे की जिद पर दिलाया था नया कपड़ा, बन गया आखिरी
इमरजेंसी के बाहर फफक रहे मृतक फहद के चाचा मुमताज ने बताया कि फहद ने शादी में नया कपड़ा पहनने की जिद की थी। कहा था, कि नया कपड़ा नहीं लाए तो शादी में नहीं जाऊंगा। भतीजे की जिद पूरी करने के लिए नया कपड़ा खरीद कर दिया था और वह बहुत खुश था, लेकिन पता नहीं था कि वह उसका आखिरी कपड़ा होगा। अगर पता होता तो नया कपड़ा नहीं खरीदते और वह जिद में नहीं जाता।