बहराइच। मेडिकल कॉलेज में तैनात रहे छह कर्मचारी आउट सोर्सिंग कंपनियों के मकड़जाल में फंस गए हैं। मेडिकल कॉलेज में तैनात छह कर्मचारियों को बिना नोटिस व सूचना के अस्पताल प्रशासन ने बाहर कर दिया। इतना ही नहीं एक कंपनी ने कर्मियों को तैनाती दी तो दूसरी कंपनी ने 20-20 हजार रुपये का बैंक ड्रॉफ्ट बनवाकर खाते में जमा करवा लिया। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व मुख्य चिकित्साधीक्षक के जारी पत्र से भी सभी पशोपेश में हैं। ऐसे में 15 माह काम करने वाले इन कर्मचारियों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।
आउट सोर्सिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में 58 कर्मचारियों की तैनाती चतुर्थ श्रेणी के पद पर हुई थी। आउट सोर्सिंग कंपनी अवनी व रामा इंफोटेक की ओर से जिला चिकित्सालय में जुलाई 2018 में इन कर्मचारियों ने ज्वॉइन किया। सभी कर्मचारियों से मेडिकल कॉलेज में बीती अक्तूबर तक कार्य कराया गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने बिना नोटिस और सूचना के सात कर्मियों को निकाल दिया। काफी मिन्नत के बाद एक कर्मचारी को पुन: रख लिया गया। जबकि मेडिकल कॉलेज की सेवा से निकाले गए छह कर्मचारी सीएमएस व प्राचार्य के यहां चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। 14 माह तक ड्यूटी करने वाले छह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
इन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल, जिलाधिकारी को पत्र देकर मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं सीएमएस और प्राचार्य द्वारा जारी पत्र में भी विरोधाभास है। सीएमएस डॉ. डीके सिंह ने बीती 17 मार्च को बाहर किए गए सभी कर्मचारियों की कार्य कुशलता व व्यवहार संतोषजनक होने के कारण सभी को जीत सिक्योरिटी एंड एचआर सर्विसेज प्रयागराज में समायोजित करने की संस्तुति कर दी। वहीं, प्राचार्य डॉ. अनिल के साहनी ने कार्य कुशलता व व्यवहार असंतोषजनक न से समायोजन न होने की बात कही। प्राचार्य की ओर से यह पत्र बीती 18 जनवरी को जारी किया गया है।
20-20 हजार रुपये का ड्रॉफ्ट किया जमा
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय में आउट सोर्सिंग कंपनी अवनी व रामा इंफोटेक की ओर से सभी कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई। इसके बाद जिला चिकित्सालय में कार्य करने के दौरान ही आउट सोर्सिंग एजेंसी मेसर्स जीत सिक्योरिटी एंड एचआर सर्विसेज प्रयागराज के खाते में 20-20 हजार रुपये का ड्रॉफ्ट भी जमा करवाया गया है।
चरित्र के बारे में मांगा, हमने लिखकर दे दिया
मेडिकल कॉलेज में जुलाई 2018 में तैनात जिन कर्मचारियों को हटाया गया था। उनके चरित्र के मामले में मुझसे लिखित मांगा गया। मैने कर्मचारियों के कार्य व्यवहार के बारे में लिख दिया। अब तैनाती की जिम्मेदारी प्राचार्य के हाथ में है।
डॉ. डीके सिंह सीएमएस मेडिकल कॉलेज
दो कर्मी कर रहे काम, शेष को तैनाती देने की कोशिश
आउट सोर्सिंग कंपनी की ओर से जिला चिकित्सालय में कर्मियों की तैनाती हुई थी। उस समय महिला व पुरुष सीएमएस भी तैनात थे। जिन छह कर्मचारियों के हटाने की बात चल रही है। उसमें एक कर्मचारी को तैनाती मिल गई है। जबकि एक ने आवेदन ही नहीं किया। दो कर्मचारी ब्लड बैंक में काम कर रहे हैं। शेष की तैनाती के लिए विचार चल रहा है। लखनऊ से मांगी गई रिपोर्ट में भी जवाब दिया गया था।
-डॉ. अनिल के साहनी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज