श्रावस्ती। जमुनहा क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर भले ही घटा हो, लेकिन इकौना क्षेत्र में राप्ती की विनाशलीला जारी है। घटते जलस्तर के साथ नदी की उग्र लहरें अपने किनारों पर तेजी से कटान कर रही हैं। जिनकी जद में आने से कई बीघा कृषि भूमि कटकर नदी की धारा में विलीन हो रही है। वहीं इकौना क्षेत्र के लैबुड़वा में लोग राहत के लिए प्रशासन की ओर निहार रहे हैं।
राप्ती नदी का जलस्तर धीरे धीरे घट रहा है। जमुनहा के राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर सोमवार सुबह आठ बजे खतरे के निशान 127.70 मीटर पहुंच कर स्थिर हो गया। घटे जलस्तर के कारण जमुनहा, गिलौला व हरिहरपुररानी क्षेत्र में नदी की उग्र लहरें अपने किनारों पर तेजी से कटान करने लगी हैं। साथ ही नदी का पानी निकलने के बाद राप्ती की तबाही के निशान भी दिखाई देने लगे हैं। एक तरफ जहां दोंदरा में राप्ती अपने तटबंध को काट रही है। वहीं इकौना के लैबुड़वा में लोगों के घरों को निगलने के लिए राप्ती कटान करते हुए आगे बढ़ रही है। यही नहीं कछार के खेतों में लगी मक्का, अरहर, मेंथा सहित सब्जी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। कई गांवों में फसल पर बाढ़ का मलवा आ जाने से उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
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कब तक तबाही झेलेंगे लैबुड़वा के ग्रामीण
इकौना। राप्ती नदी के तट पर बसे इकौना के लैबुड़व में पूर्व प्रधान कंधई लाल सहित आठ ग्रामीणों के मकान नदी के निशाने पर है। यहां नदी गांव निवासी अलखराम यादव, शिवकुमार, राघव राम, देवेंद्र प्रताप, सरबजीत, दिनेश कुमार, राकेश कुमार, अशोक कुमार का पक्का मकान अपनी आगोश में लेने के लिए कटान करती हुई आगे बढ़ रही है। इससे इन परिवारों के बेघर होने का खतरा मंडराने लगा है।
एक तरफ जहां राप्ती नदी पूर्व प्रधान के घर के किनारे पहुंच गई है। वहीं शिवकुमार व देवेंद्र का पक्का मकान व टिन शेड नदी में समाहित हो चुका है। ऐसे में ग्रामीण अब राहत के लिए प्रशासन की ओर निहार रहे हें। ग्रामीण छेदी राम, चिंताराम, अखिलेश, छोटेलाल, हरिराम, राघव राम, ननके व चुन्नू का कहना है कि बसना व उजड़ना लैबुड़वा के लोगों का नसीब बन चुका है। यहां ग्रामीण कब तक तबाही झेलेंगे इसकी जानकारी देने के लिए कोई तैयार नहीं है।