बहराइच की जिला कारागार की क्षमता 550 बंदियों की है। जबकि वर्तमान में लगभग 1320 बंदी निरुद्ध हैं। क्षमता से दोगुने बंदी होने के कारण जेल में खाने पीने और रहने की दिक्कत अधिक हो रही है। किसी तरह से अधिकारी व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। इससे बंदियों में असंतोष पनपता रहता है। कभी भी जेल में उपद्रव की चिंगारी भड़क सकती है।
बहराइच की जेल में नेपाल और श्रावस्तीर के बंदी भी निरुद्ध रहते हैं। जेल में 13 बैरक और दो महिला बैरक हैं। जिनकी क्षमता महज 550 बंदियों की है। जेल में वर्तमान समय में 1320 बंदी निरुद्ध हैं। हालांकि कभी भी इनकी संख्या एक हजार से कम नहीं रहती है।
दोगुने बंदी होने के बाद भी महज 30 से 35 बंदी रक्षकों, दो डिप्टी जेलर और एक जेलर के साथ अधीक्षक ही सारी व्यवस्थाएं संभालते हैं। जेल के भंडारगृह में भी बंदियों को ही लगाकर खाना बनाने का काम किया जाता है। एक बैरक में औसतन सौ से डेढ़ सौ तक बंदी निरुद्ध रहते हैं। जिससे जिला कारागार में बंदियों के बीच कहासुनी की स्थिति बनी रहती है।
ई बार जेल से बाहर लॉकअप पहुंचने पर विद्रोह भी हो चुका है। हालांकि जेल में ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी है। लेकिन बंदियों की संख्या अधिक होने से खाने से लेकर रहने तक में अव्यवस्था रहती है।
व्यवस्थाओं पर रहती है नजर
जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। किसी भी बंदी को उसके परिवार के लोगों के पहुंचने पर मिलने से पाबंदी नहीं होती है। इसके साथ ही खाने और रहने की भी दिक्कत नहीं है। कुछ बैरकों को बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उम्मीद है जल्द ही बजट आवंटित हो जाएगा। जिसके बाद काम शुरू करा दिया जाएगा।
-एसके सिंह, जेलर, बहराइच