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तीन ब्लॉक देंगे पयागपुर तहसील को शक्ल

Tue, 01 Sep 2015 10:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। पयागपुर को तहसील बनाने की मंजूरी मंगलवार को कैबिनेट के प्रस्ताव में मुख्यमंत्री ने स्वीकृत कर दी है। इससे पयागपुर क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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यह तहसील पयागपुर और विशेश्वरगंज विकासखंड के साथ ही हुजूरपुर विकासखंड आंशिक की 162 ग्राम पंचायतों से मिलकर फिर अस्तित्व में आएगी।

वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने तहसील खत्म करने की अधिसूचना जारी की थी तब से क्षेत्र के लोग तहसील बनाने की मांग कर रहे थे। तहसील बनने से छह लाख से अधिक की आबादी को लाभ मिल सकेगा।

पयागपुर तहसील को लेकर राजनीति 90 के दशक से चल रही है। इस राजनीतिक उठापटक के बीच 22 मई 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पयागपुर तहसील की घोषणा की थी।
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अगस्त 1997 में अधिसूचना जारी की गई थी लेकिन इसी दौरान कुछ लोगों ने पयागपुर तहसील का विरोध करते हुए उसे खत्म करने की आवाज बुलंद कर दी थी।

26 मई 2001 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने पयागपुर तहसील को खत्म कर सदर तहसील में समाहित कर दिया था। इसके बाद फिर तहसील को लेकर राजनीति शुरू हुई।

क्षेत्रीय विधायक मुकेश श्रीवास्तव ने सदन में आवाज बुलंद की। वहीं, विधानसभा चुनाव के दौरान वर्तमान राज्यमंत्री विनोद सिंह पंडित ने तहसील का दर्जा पयागपुर को दिलाने का आश्वासन दिया।

रस्साकसी के बीच अंतत: मंगलवार को प्रदेश सरकार के कैबिनेट की बैठक में पयागपुर को तहसील बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। प्रस्ताव के तहत पयागपुर तहसील में विकासखंड पयागपुर और विशेश्वरगंज के साथ हुजूरपुर विकास खंड आंशिक शामिल रहेगा।

सदर व कैसरगंज तहसील का कम हो जाएगा दायरा
पयागपुर तहसील के अस्तित्व में आने के बाद सदर तहसील का दायरा लगभग आधा घट जाएगा। इस समय पयागपुर और विशेश्वरगंज विकासखंड सदर तहसील में शामिल है। वहीं, हुजूरपुर विकासखंड कैसरगंज तहसील का हिस्सा है। इसका आंशिक क्षेत्र पयागपुर तहसील में समाहित होगा। इसके अलावा हुजूरपुर कानूनगो सर्किल अस्तित्व में आएगी।

तहसील संचालन के लिए दो स्थान चिह्नित
मुख्य राजस्व अधिकारी यूएस उपाध्याय ने बताया कि शासन ने जो प्रस्ताव मांगा था, उसके तहत पयागपुर के कोट बाजार में पुराने तहसील भवन को फिर चिह्नित किया गया है। यह राजघराने के भवन का हिस्सा है।
वहीं पयागपुर बस अड्डा बाजार के निकट थाने से सटा एक भवन भी चिह्नित किया गया है। दोनों प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। जहां अनुमति होगी, वहां शासन के निर्देश पर तहसील का संचालन होगा।
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