बहराइच। पोषण तत्वों से भरपूर सहजन की खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए। मार्केटिंग की भी व्यवस्था की जाए। गंगा की सहायक नदियों, जलाशयों, सरोवरों एवं तालाबों का अभिलेखीकरण करते हुए इन्हें ईको टूरिज्म से जोड़ने के लिए कार्ययोजना तैयार करें। नदियों, जलाशयों, सरोवरों को कतर्नियाघाट के साथ सर्किट के रूप में विकसित किया जाए। प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक इकाइयों में सर्वोच्च न्यायालय एवं एनजीटी के मानकों का पालन कराया जाए।
ये बातें बुधवार को कलेक्ट्रेट में बैठक के दौरान राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) प्रधान न्यायपीठ नई दिल्ली के सदस्य व न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद ने कहीं। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए नवाचार की सराहना की। कहा कि फसल अवशेष से एनर्जी पिलेट्स तैयार करने के मॉडल को एनजीटी द्वारा हरियाणा सहित देश के अन्य प्रदेशों में लागू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि रोपित किए गए पौधों के सरवाईवल रेट में इजाफा किया जाए। गत वर्ष रोपित किए गए पौधों का सत्यापन भी करा लिया जाए।
उन्होंने कहा कि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ऐसी प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। नगर निकायों में ग्रीन बेल्ट विकसित कर उसकी सुंदरता बढ़ाई जाए। उन्होंने 120 माइक्रोन से नीचे के प्लास्टिक पर सख्ती से रोक लगाकर, कागज एवं कपड़ों के थैलों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
इस अवसर पर डीएम मोनिका रानी, एसपी प्रशांत वर्मा, सीडीओ कविता मीना, एडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिंह, नगर मजिस्ट्रेट शालिनी प्रभाकर, डीडीओ महेन्द्र कुमार पांडेय, उप निदेशक कृषि टीपी शाही, सीएमओ डॉ. एसके. सिंह, डीएफओ कतर्नियाघाट के आकाश दीप बधावन, संजय शर्मा, ईओ बालमुकुन्द मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी राघवेन्द्र द्विवेदी, चन्द्रेश कुमार आदि मौजूद रहे।