सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह बुधवार को या दुहाई गाजी सरकार की स्वर से गूंज उठी। बसंत मेले मेें पहुंचे तमाम जायरीन ने परंपरा के मुताबिक जियारत कर सुख समृद्धि और अमन-चैन की कामना की। वहीं, दरगाह प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और खादिमों ने परंपरा के मुताबिक फल फूल व सब्जियों की डालियां पेश कीं। इस दौरान समाज, देश और प्रदेश में शांति कायम रहने की दुआ मांगी गई। इसके बाद दरगाह परिसर में गरीबों व निराश्रितों को खिचड़ी बांटी गई।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर इस समय तीन दिवसीय बसंत मेला चल रहा है। बुधवार को मुख्य मेले का आयोजन हुआ। मेले में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए पहुंचे।
गाजी की इबादत का सिलसिला भोर में शुरू होकर देर रात तक चला। परंपरा के मुताबिक दोपहर में दरगाह प्रबंध समिति के ओएसडी खुर्शीद अनवर रिजवी, दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद, बच्चे भारती, नोमान अतहर, अजमत उल्लाह, डॉ. मोहम्मद आफाक, मकसूद अहमद रायनी व दरगाह के खादिमों ने फल फूल और सब्जियों की डालियां गाजी की मजार पर पेश-ए-खिदमत कीं।
इस दौरान जायरीनों की समस्याओं को सुलझाने के साथ ही देश में अमन-चैन कायम रखने की दुआ मांगी गई। इबादत का सिलसिला समाप्त होने के बाद प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने नाल दरवाजा, प्रशासनिक भवन के बरामदे, सालार बाग, पलरी बाग आदि स्थानों पर ठहरे जायरीन को परंपरा के तहत खिचड़ी का वितरण किया।
गाजी की दरगाह में गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया, बढ़नी, बाराबंकी, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, नेपाल से आए तमाम जायरीन ने हाजिरी लगाई। पूरे दिन चित्तौरा झील के तट से दरगाह पर जायरीन जत्थों में पहुंचे। प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि बसंत मेला का मुख्य दिन होने के चलते करीब एक लाख जायरीन जुटे रहे।