बहराइच मेडिकल कालेज में इलाज कराने परिजनों के साथ पहुंचा दरगाह थानाक्षेत्र निवासी बाबूराम।
बहराइच। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाएं किस कदर बेपटरी हुई हैं, इसका एक उदाहरण मंगलवार को देखने को मिला। यहां एक गरीब हाथ गंवाने के बाद ड्रेसिंग के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे में भटकता दिखा। वहीं, जिम्मेदार उसके कटे हाथ को देखने के बाद भी संवेदनहीन बने रहे। इस दौरान सीएमएस का सीयूजी नंबर भी बंद रहा।
मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित सीएमओ कार्यालय पर मंगलवार को दरगाह थाना क्षेत्र के मानपुरवा निवासी बाबूराम(30) अपने भाई व पिता के साथ पहुंचे। इनका एक हाथ कंधे के पास से कटा था। वहां लोगों से इलाज कहां मिलेगा पूछने लगे। लोगों ने इसके लिए ओपीडी और इमरजेंसी में जाने को कहा। इस पर पीड़ित बाबूराम में जब अपनी व्यथा बताई तो सभी चौंक गए।
बाबूराम ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह श्रमिक हैं और ट्रैक्टर-ट्राॅली चलाते हैं। 17 जनवरी को ट्राॅली पलटने से उनका हाथ कट गया था। प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सकों ने ट्राॅमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। वहां 10 दिन भर्ती रखने के बाद 26 जनवरी को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया और बहराइच में ड्रेसिंग करवाने की बात कही।
इमरजेंसी से भेजा 22 नंबर कमरा, फिर बोला लखनऊ जाओ
बाबूराम ने बताया कि मंगलवार को वह ड्रेसिंग के लिए भाई व पिता के साथ आए थे। पीड़ित व उसके भाई मुकेश ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह लखनऊ का डिस्चार्ज कागज लेकर ड्रेसिंग के लिए इमरजेंसी पहुंचे थे। वहां पहले पर्चा बनवाने के लिए कहा गया। जब पर्चा बनवा कर पहुंचे तो 22 नंबर में आर्थो विभाग में जाने को कहा। जब वहां पहुंचे तो वहां से फिर इमरजेंसी भेजा गया। इमरजेंसी पहुंचने पर कर्मियों ने लखनऊ या निजी चिकित्सक के पास जाने को कहा।
ड्रेसिंग के लिए एक युवक आया था। उसका घाव ज्यादा है। मामला मेरे संज्ञान में आने पर मैंने इमरजेंसी चिकित्सक डॉ. शिवम मिश्रा को युवक को भर्ती कर बेहतर इलाज के लिए निर्देशित किया है। युवक को भर्ती कर लिया गया है।
डॉ. मिथिलेश कुमार, इमरजेंसी प्रभारी