मिहींपुरवा/मोतीपुर। कतर्निया के जंगल से सटे इलाकों में शनिवार की रात फिर से बरसात शुरू हो गई। इसी दौरान जमकर ओले भी गिरे, जिससे फसलें और भी अधिक तबाह हो गईं। कृषि अधिकारियों के अनुसार करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर फसल के नुकसान का अनुमान है। अचानक बिना मौसम हो रही बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को तगड़ी चपत लगी है। उनकी गेहूं, सरसों आदि फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसान अपनी बर्बाद फसल को देखकर मायूस हैं।
विकास खंड मिहींपुरवा का कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग से सटा इलाका जंगलों से घिरा हुआ है। कतर्निया के जंगली इलाके में सब्जी की खेती सबसे अधिक होती है। इसके अलावा गेहूं, सरसों, मसूर आदि की भी पैदावार होती है। शनिवार की रात अचानक आसमान में बादल छा गए। बादलों की तेज गड़गड़ाहट से किसान सहम गए। शहरी इलाके में तो अधिक बरसात नहीं हुई, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में तेज बारिश हुई।
मिहींपुरवा क्षेत्र के गंगापुर, रमपुरवा मटेही, पटरहिया, मोतीपुर, गायघाट, रायबोझा आदि इलाकों में शनिवार की रात अचानक बारिश के साथ ही ओले गिरने शुरू हो गए। ओले गिरते देख किसान फिर से परेशान हो उठे। खेतों में तेज हवाओं और ओले के कारण बाली लगी गेहूं और सरसों की फसल बिछ गई, जिससे किसानों को तगड़ी चपत लगी है। रविवार की सुबह किसानों ने जब खेत देखे, तो मायूस हो गए। जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय के अनुसार शनिवार की रात हुई बारिश और ओले गिरने से करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर फसल के नुकसान की आशंका है। हालांकि राजस्व और कृषि विभाग की टीम सर्वे के लिए भेजी जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
आम के बौर को सबसे अधिक नुकसान
मौसम में गर्मी बढ़ने के साथ ही आम में बौर आने शुरु हो गए थे। जिससे किसानों को इस बार आम की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद थी। मगर एक सप्ताह के अंदर हो रही लगातार ओलावृष्टि और आंधी के कारण बौर गिर गए हैं। जिससे किसान उत्पादन पर प्रभाव पड़ने की आशंका जता रहे हैं।
पश्चिमी विक्षोभ है कारण
तराई में मौसम का बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है। अभी मौसम में और भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। करीब छह मिलीमीटर बरसात मिहींपुरवा इलाके में दर्ज की गई है। 24 घंटे में हल्की बारिश और बदली की संभावना है।
- डॉ. एमपी सिंह, प्रभारी, फसल अनुसंधान केंद्र