गांगू देवर गांव में मामूली विवाद के चलते वर्ष 2008 में कुछ लोगों ने एक ग्रामीण पर हमला कर उसे मारापीटा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस पर आठ लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ था। गुरुवार को मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश प्रेमकला सिंह ने की। उन्होंने तीन सगे भाइयों समेत चार आरोपियों को दोषसिद्ध करार देते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई। साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया गया।
दीवानी कचहरी के डीजीसी क्रिमनल संत प्रताप सिंह ने बताया कि विशेश्वरगंज थाना अंतर्गत गांगू देवर निवासी श्रीराम 21 मार्च 2008 को खेत में गन्ना की पत्ती छील रहे थे। इसी दौरान गांव निवासी प्रह्लाद सिंह, परशुराम सिंह, राधेश्याम सिंह पुत्रगण हरिहर सिंह व राजू सिंह, सुनील सिंह, टुनटुन सिंह, गंगा सिंह तथा पिंटू सिंह खेत में आ धमके। सभी छीले गए गन्ने के आगे का हिस्सा मांगने लगे। श्रीराम के विरोध करने पर विपक्षियों ने हमला कर दिया।
श्रीराम के शोर मचाने पर रामफकीरे, ननके, सुंदरलाल, भीखू व माधव बचाव करने दौड़े। उन्हें भी हमलावरों ने पीटकर लहूलुहान कर दिया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। वहां पर घटना के दिन देर रात श्रीराम की मौत हो गई। इस पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। गुरुवार को मामले की फाइल सत्र न्यायाधीश प्रेमकला सिंह के न्यायालय पर पेश हुई।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश ने सगे भाई प्रह्लाद सिंह, परशुराम और राधेश्याम सिंह के अलावा राजू सिंह को दोषसिद्ध करार देते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई। साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।