चरदा। सीएचसी चरदा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। अस्पताल परिसर स्थित लैब के बगल लगे कूड़े के ढेर में एक्सपायर जीवनरक्षक दवाएं शुक्रवार को पड़ी मिलीं। इनमें एमाक्सीसिलीन, मेट्रोजिल, पैरासिटामोल और टीबी मरीजों को दी जाने वाली रिफापेंटाइन 300 एमजी जैसी महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं और बाहर की दवाएं लिख दी जाती हैं। दूसरी ओर अस्पताल में आने वाली सरकारी दवाएं समय पर वितरण न होने के कारण एक्सपायर हो रही हैं। इसके बाद इन्हें नियमानुसार नष्ट करने के बजाय खुले में कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाता है, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में इस तरह दवाओं का खुले में पड़ा होना संक्रमण और प्रदूषण का खतरा बढ़ा सकता है। खासकर टीबी जैसी गंभीर बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का इस तरह फेंका जाना स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।
दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
पूरे प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
-डॉ. संजय शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी