बहराइच। जिले के जिम्मेदार हुक्मरानों की मेहरबानी से मनरेगा योजना में 40 से 50 साल पहले मर चुके मुर्दे भी काम कर रहे हैं। मुर्दों के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों में कार्यरत कर्मी भी मनरेगा योजना का लाभ ले रहे हैं और शासन से पैसा लेने के साथ-साथ श्रमांश भी उठा रहे हैं।
महसी विकासखंड के ग्राम पंचायत पंचदेवरी के जिम्मेदारों ने मनरेगा विभाग के कर्मचारियों से साठ-गांठ कर योजना में जमकर भ्रष्टाचार किया। भ्रष्टाचारियों ने 40-50 साल पहले मर चुके लोगों को कागजों में जीवित कर दिया। यही नहीं कागजों में लाखों का कार्य भी करवा डाला और बैंको से उनका श्रमांश भी निकल गया। मृतकों के साथ जिम्मेदारों ने सरकारी कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ा।
इस धांधली का खुलासा लोकपाल मनरेगा उमेश तिवारी की जांच में हुआ। जांच रिपोर्ट के मुताबिक पचदेवरी स्थित संविलियन विद्यालय में शिक्षामित्र के रुप में कार्यरत भूलन ने भी गांव में नाला सफाई, खड़ंजा निर्माण कर डाला। इसके एवज में उन्हें 12978 रुपए का भुगतान किया गया। इस दौरान वह विद्यालय में भी मौजूद रहे।
प्राथमिक विद्यालय पचदेवरी में कार्यरत रसोइया ने भी चकमार्ग पटाई, अमृत सरोवर खुदाई आदि की और इन्हें 7455 रुपए का भुगतान किया गया। जबकि ये भी कार्य के दौरान विद्यालय में मौजूद रहीं। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ 30 से अधिक मृतकों ने भी जिम्मेदारों की मेहरबानी के चलते चलते मनरेगा योजना में काम कर लाखों का श्रमांश निकाला है।
एक साथ दो-दो स्थानों पर करवा डाला काम
पचदेवरी में सिर्फ मृतकों व सरकारी कर्मचारियों के नाम पर ही भ्रष्टाचार नहीं किया गया बल्कि कई ऐसे भी हैं, जिन्हें एक ही समय पर दो-दो स्थानों पर उपस्थित दिखा कर लाखों रुपए का खेल हुआ। कभी श्रमिक को उसके पिता के साथ कार्यकर्ता दिखाया गया और कभी उसे उसकी पत्नी के साथ कार्य करता दर्शाया गया।
जांच में वर्तमान प्रधान मधु देवी, तत्कालीन सचिव पर 7, 06, 149 रुपए के गबन के दोषी मिले हैं। इनसे समानुपात में रुपयों की रिकवरी करवाने का आदेश दिया है। शिक्षामित्र भूलन, रसोईया सरिता देवी से भी रिकवरी की जाएगी। साथ ही तत्कालीन पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, महिला मेट व वर्तमान प्रधान के खिलाफ विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया है। कार्रवाई शासन द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ की रिपोर्ट के बाद अमल में लाई जाएंगी।
उमेश तिवारी, लोकपाल मनरेगा