तराई में अचानक मौसम के करवट लेने से शुक्रवार की सुबह से झमाझम बरसात हुई। इस दौरान घाघरा नदी के तटवर्ती इलाकों में ओले भी गिरे, जिससे किसानों की 25 फीसदी फसल चौपट हो गई है। गेहूं, मसूर, सरसों और मटर की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। वहीं, बारिश के चलते जलभराव की समस्या से भी गांवों, कस्बों और शहरों में लोग जूझते रहे। 10 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई है। मौसमविदों की मानें तो आगामी दो दिनों तक तराई के मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने का अनुमान है।
तराई के किसान इस बार मौसम के मिजाज से काफी खुश थे। वर्ष 2017 के शुरू से ही मौसम साथ दे रहा था, जिससे किसानों को आस थी कि उन्हें खेतों में खड़ी फसलों से भरपूर मुनाफा होगा। लेकिन बुधवार से तराई में मौसम ने करवट लेनी शुरू की। बदली के बीच शुक्रवार भोर से झमाझम बरसात शुरू हो गई। सुबह लोग जगे तो ठंड से कांप उठे। बरसात के बीच दिन की शुरुआत हुई।
करीब 10 बजे लगा कि बरसात थमेगी, लेकिन पूरे दिन रुक-रुक कर बादल बरसे। इस तेज हवाएं भी चलीं। वहीं, कैसरगंज और महसी के घाघरा नदी परिक्षेत्र में हल्के ओले भी गिरे। बरसात और ओलावृष्टि के बीच तेज हवा चलने से खेतों में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लगभग 25 फीसदी गेहूं की फसल खेतों में पसर गई है। 10 फीसदी अरहर और 30 फीसदी सरसों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
मटर, मसूर, चना, धनिया व बागवानी की खेती भी प्रभावित हुई है। बारिश के चलते किसानों को तगड़ी चपत लगी है। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पूरे जिले में औसतन 10 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई है। आगामी दो दिन तक मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। बौछारें पड़ सकती हैं। पूरे दिन पानी बरसने से गांव, शहर और कस्बों में जगह-जगह जलभराव की स्थिति भी बन गई, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि बेमौसम हुई बरसात और तेज हवाओं के चलने से गेहूं, सरसों की फसल प्रभावित हुई है। किसान खेतों में पानी न जमा होने दें। फसल की स्थिति पर नजर रखें। अगर फसल की पत्तियां पीली दिखाई पड़ें तो विशेषज्ञ से संपर्क करें।