श्रावस्ती। अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड, बहराइच की कई योजनाएं रास्ते से ही गायब हो गईं। जांच के दौरान एक लाख रुपये रिश्वत लेने के साथ-साथ अपात्रों को भी योजनाओं का लाभ मिला।
इसका खुलासा श्रावस्ती के जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास की टीम ने जांच के बाद किया। रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को भेजी गई है।
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड द्वारा बहराइच में संचालित स्वत: रोजगार योजना अंतर्गत लगभग पांच सौ लाभार्थियों को लाभ मिला था।
लाभार्थियों के सत्यापन की जिम्मेदारी श्रावस्ती के जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास रिंकू सिंह राही को मिली थी। इस जांच में कई घोटाले सामने आए।
भौतिक सत्यापन के दौरान वर्ष 2010-11 में लांड्री एवं ड्राई क्लीनिंग योजना के अंतर्गत लाभान्वित सुखराम व 2008-09 के लाभार्थी राधेश्याम, राजाराम, श्याम कुमार, संगम प्रसाद, दुर्गेश, विनोद कुमार द्वारा आज तक लांड्री ही स्थापित नहीं की गई।
इन लोगों द्वारा आज भी हाथों से ही कपड़ा धोया जाता है। जबकि इनमें से श्याम कुमार ने ड्राई क्लीनिंग का बोर्ड तो लगा रखा था लेकिन घरेलू वॉशिंग मशीन से कपड़ा धोने का काम करते थे।
यही नहीं, लाभार्थी जंगली प्रसाद सेना से सेवानिवृत्त हैं। जिन्हें पेंशन भी मिलती है। उनके दो पुत्रों संगम लाल व विनोद कुमार को भी इस योजना का लाभ दिया गया है।
जांच के दौरान लाभार्थी श्याम कुमार व दुर्गेश कुमार ने योजना का लाभ लेते समय क्रमश: 40 हजार व साठ हजार बतौर रिश्वत देने का भी आरोप लगाया।
इन्हें तो ऋण की जानकारी ही नहीं
कनछेद, गुल्ले, जगन्नाथ, जगरानी पत्नी जंगीराम, बृजलाल ने किसी भी योजना से ऋण व अनुदान का लाभ प्राप्त करने से इंकार किया है। इनका कहना है कि उनके खाते में न तो कोई धन आया है और न ही उसकी उन्हें कोई जानकारी ही है।
चाय नाश्ता कराने के बाद मिली दुकान
दुकान निर्माण योजना के तहत दुकान प्राप्त करने वाले सुखराम का कहना है कि जब भी वह दुकान योजना का लाभ लेने के संबंध में समाज कल्याण कार्यालय गया तो उसे 250-300 रुपये चाय नाश्ते पर खर्च करना पड़ा। आवंटन से पूर्व तक लगभग तीन हजार रुपये उसने चाय नाश्ते पर खर्च किया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास, रिंकू सिंह राही ने बताया कि बहराइच में विभागीय योजनाओं के सत्यापन में भारी कमियां मिली हैं। कहीं रिश्वत लेने तो कहीं योजना का लाभ लेने के लिए चाय नाश्ते पर खर्च करने का आरोप लाभार्थियों द्वारा लगाया गया है।
रिपोर्ट वीडियोग्राफी के साथ प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम लिमिटेड लखनऊ को भेजा गया है।