बिछिया। कतर्नियाघाट में अब नदी और जंगलों के संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से यहां जलज परियोजना के तहत एक जागरूकता एवं विक्रय केंद्र स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र के जरिये जहां गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद बेचने का मंच भी मिलेगा।
इस केंद्र में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों की बिक्री होगी। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। साथ ही यहां आने वाले पर्यटक भी स्थानीय उत्पाद खरीद सकेंगे।
जलज केंद्र को केवल बिक्री केंद्र नहीं, बल्कि जागरूकता केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुओं और अन्य जलीय जीवों से जुड़ी जानकारी देने के लिए थ्री-डी मॉडल और विशेष प्रदर्शन लगाए जाएंगे। इससे पर्यटकों, छात्रों और स्थानीय लोगों को नदी और उसके जीवों के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में कतर्नियाघाट में विकसित होने वाला यह 23वां जलज केंद्र होगा। इसके माध्यम से संरक्षण, ईको-टूरिज्म, पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय लोगों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। परियोजना से महिलाओं, युवाओं और नाविक समुदाय को भी रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान की डीन डॉ. रुचि बडोला ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य केवल जलीय जीवों को बचाना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को संरक्षण से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी है।
गंगा बेसिन के आठ राज्यों में चल रही इस परियोजना से अब तक 10 हजार से अधिक लोग रोजगार और आजीविका से जुड़ चुके हैं। कतर्नियाघाट में शुरू होने वाला केंद्र इस कड़ी को और मजबूत करेगा।
ये होगा फायदा
महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा
स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा
डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुओं के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा
युवाओं और नाविक समुदाय के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे