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घसियारीपुरा व नौव्वागढ़ी वालों के लिए नासूर बना जलभराव

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बहराइच। शहर के बीचोबीच स्थित घसियारीपुरा व नौव्वागढ़ी आबाद होने के बाद से ही जलभराव से जूझ रहा है। शनिवार को हुई बरसात का असर यहां सोमवार दोपहर तक देखने को मिला। अब भी लोग सड़कों पर नहीं निकल पा रहे हैं। दो दशकों से हर चुनाव में जनप्रतिनिधि भी इस समस्या से निजात दिलाने का वादा करते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता है। एक दशक पूर्व इन मोहल्लों में सीवर लाइन बिछाने की योजना बनी थी, लेकिन वह भी कागजों में दफन हो चुकी है। नतीजा यह है कि यहां से पानी निकालने के लिए नगर पालिका प्रशासन को पंप का सहारा लेना पड़ता है। यहां के लोग आए दिन डीएम, विधायक और क्षेत्रीय नेताओं के पास जाते हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।
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नगर पालिका में आने वाले शहर के घसियारीपुरा व नौव्वागढ़ी वार्ड की आबादी 20 हजार से अधिक है। ये मोहल्ले 2000 से जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मोहल्ले के निचले स्थानों पर है। यहां कई-कई महीनों तक जलभराव की समस्या बनी रहती है। मोहल्लों में जलभराव का आलम यह है कि कई महीने मकानों के अंदर गंदा पानी भरा रहता है, जिससे कई मकान क्षतिग्रस्त भी हो चुके हैं। घसियारीपुरा स्थित टाटा मोटर्स के पास और प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर के सामने व आसपास वाला इलाका जलभराव से सबसे ज्यादा प्रभावित है।
कुछ स्थान ऐसे हैं जहां हल्की सी बरसात में ही घुटनों तक पानी भर जाता है। नगर पालिका प्रशासन को पानी निकालने के लिए पूरे वर्ष इंजन का सहारा लेना पड़ता है। बता दें कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान सदर सीट से लड़ रहीं अनुपमा जायसवाल ने समस्या से निजात दिलाने का वादा किया था। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद वह वादा भूल गईं। 2022 में चुनाव से पूर्व उन्होंने कुछ स्थानों पर नालियों का निर्माण जरूर कराया।
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जलनिकासी की समस्या से जूझ रहे मोहल्लेवासियों ने आंदोलन के लिए घसियारीपुरा बचाओ संघर्ष समिति का गठन कर आंदोलन शुरू किया था। समिति के अध्यक्ष वीडी मिश्रा व डिग्री कॉलेज के दिवंगत शिक्षक विवेक दीक्षित की अगुवाई में डेढ़ दशक तक संघर्ष चला था। कई बार धरना-प्रदर्शन भी हुआ, लेकिन हालात जस के तस हैं।
समिति के आंदोलन के बाद नगर पलिका प्रशासन ने 28 करोड़ रुपये से सीवर लाइन बिछाने की कार्ययोजना बनाई थी। इससे लोगों में उम्मीद जगी थी। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के अधिकारियों ने मोहल्ले का भ्रमणकर जलभराव वाले स्थान चिन्हित भी किए थे, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ। यह योजना कागजों में दफन हो चुकी हैं।
ईओ के स्थानांतरण के बाद मुझे प्रभार सौंपा गया है। मोहल्ले की समस्या पुरानी है। समस्या के समाधान के लिए योजना बनाई जा रही है। शीघ्र ही मोहल्लेवासियों को समस्या से निजात दिलाई जाएगी। - देवेंद्र धीमान, सहायक अभियंता, नगर पालिका, बहराइच
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