बहराइच। बुधवार से जंगल में सैर करने आने वाले पर्यटकों को बाघों की दहाड़ व मगरमच्छों की उछलकूद नहीं दिखाई देगी। कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार के दीदार पर बुधवार से प्रतिबंध लग जाएगा। कतर्निया घूमने का शौक रखने वालों को अब 14 नवंबर तक इंतजार करना पड़ेगा। बुधवार को आखिरी दिन होने के कारण सैर सपाटा करने वाले पर्यटकों के काफी संख्या में उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। दोपहर के बाद जंगल बंद कर दिया जाएगा।
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार 551 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस वन क्षेत्र में सात रेंज हैं। इनमें कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा व मुर्तिहा रेंज में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ, काकड़, पाढ़ा, बारहसिंघा, गैंडे व हाथी समेत कई वन्य जीव विहार करते हैं। जंगल के बीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में डॉल्फिन की उछलकूद पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है। घड़ियाल भी काफी संख्या में नदी के टापुओं पर रोमांचित करते हैं, लेकिन बरसात की आहट के चलते वन्यजीव विहार में भ्रमण पर 15 जून से हर साल की तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
कतर्नियाघाट के डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि बरसात के महीने में जंगल में बने शेड खराब हो जाते हैं। रास्ते भी झाड़ियों व जंगली घास से अवरुद्ध रहते हैं। जंगल के रास्तों पर कीचड़ और पानी भर जाता है। वन्य जीवों के हमले का खतरा भी रहता है। इससे आवागमन में परेशानी होती है। गेरुआ नदी में पानी अधिक होने से बोटिंग करने में भी खतरा रहता है जिसके चलते प्रति वर्ष पांच महीने पर्यटकों के भ्रमण पर अंकुश लगा दिया जाता है। बरसात का मौसम खत्म होने के बाद 15 नवंबर से वन्य जीव विहार नई तैयारी के साथ पर्यटकों के भ्रमण के लिए फिर खोला जाएगा।