रुपईडीहा (बहराइच)। पड़ोसी देश नेपाल में बृहस्पतिवार को होने वाले निकाय चुनाव को देखते हुए सुरक्षा के दृष्टिगत भारत-नेपाल सीमा मंगलवार की रात 12 बजे से सील कर दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच नागरिकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार भी ठप हो गया है। नतीजतन दोनों देशों के व्यापारियों में मायूसी नजर आ रही है। दूरदराज के प्रांतों से सामान लेकर आने वाले ट्रक समेत अन्य वाहन भी सीमा पर फंसे हुए हैं। भारतीय क्षेत्र में भी काफी दूरी तक मालवाहक वाहनों की कतार लगी हुईं हैं। ऐसे में व्यापारी हों या आम नागरिक, सभी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होने के बाद सीमा खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
नेपाल में बृहस्पतिवार को होने वाला निकाय चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए दोनों देशों के प्रशासनिक व सुरक्षा अधिकारी कड़ी चौकसी बरत रहे हैं। बीते दिनों नानपारा के अगैया स्थित एसएसबी मुख्यालय पर दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक में चुनाव सकुशल कराने के संबंध में चर्चा हुई थी। बैठक में ही दोनों देशों के मध्य चुनाव के दौरान अराजक तत्वों की घुसपैठ रोकने के लिए दस मई से 13 मई की रात तक दोनों देशों के मध्य सीमा सील करने का निर्णय लिया गया था। मंगलवार की रात दस बजे सीमा सील कर दी गई। सीमा सील होने से दोनों देशों के मध्य नागरिकों का आवागमन तो ठप हुआ ही, दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर भी अंकुश लग गया है।
प्रतिदिन काफी संख्या में नेपाली नागरिक घरेलू वस्तुओं की खरीदारी करने भारतीय सीमा क्षेत्र स्थित रुपईडीहा बाजार आते थे। इसी प्रकार भारतीय क्षेत्र से भी काफी संख्या में भारतीय नागरिक विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, कपड़ों आदि की खरीदारी करने नेपाल के बाजार में जाते थे। सीमा सील होने के कारण भारतीय क्षेत्र स्थित सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि भारत-नेपाल के बीच प्रतिदिन करोड़ों रुपये का व्यापार होता है, लेकिन चुनाव के तहत सीमा सील होने के कारण व्यापार ठप हो गया है जिससे भारतीय व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रतिदिन दोनों देशों के लगभग 70 हजार नागरिकों का आवागमन इधर-उधर होता है। आवागमन बंद होने के कारण टैक्सी संचालकों व पर्यटन क्षेत्र में कारोबार करने वालों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भारतीय दैनिक वेतनभोगी मजदूर नेपाल की प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करने जाते थे। इन्हें भी सीमा सील होने के कारण घरों में रहने को विवश होना पड़ रहा है जिससे इनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो रहा है।
भारत व नेपाल के नागरिकों के बीच वैवाहिक संबंध भी होते हैं। चुनाव के तहत सीमा सील होने का निर्णय कुछ दिनों पूर्व ही लिया गया है जबकि काफी संख्या में दोनों देशों के नागरिकों के बीच होने वाले वैवाहिक समारोहों की तिथियां पहले ही निर्धारित हो चुकी थीं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बारात लेकर आने वाले वर पक्ष के वाहन को तो सीमा पार करने दी जा रही है, लेकिन बरातियों को रोका जा रहा है।
भारत-नेपाल सीमा सील होने के बाद भी पेट्रोलियम उत्पादों, एंबुलेंस, गंभीर रोगियों व दाह संस्कार में जाने वालों को दोनों देशों के बीच आवागमन की सुविधा प्रदान की गई है। साथ ही आवश्यक दवाएं लाने के लिए मरीजों व तीमारदारों को भी आवागमन करने दिया जा रहा है जिससे मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
एसएसबी 42 वीं वाहिनी के निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि सीमा पर पेट्रोलियम उत्पाद व मेडिकल आपातकालीन सेवाओं में प्रयोग होने वाले वाहनों को आवागमन की सुविधा प्रदान की गई है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी को परेशानी न हो।
अरुन कुमार।
उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय कुमार मित्तल ने बताया कि भारत-नेपाल के सीमावर्ती कस्बे रुपईडीहा में 72 घंटे के लिए सीमा बंद होने से व्यवसाय पर खासा प्रभाव देखने को मिल रहा है। 80 से 90 प्रतिशत तक व्यवसाय ठप हो गया है।
विजय कुमार मित्तल।
आपातकालीन सेवाओं के लिए सहूलियत
नेपाल के इलाका प्रहरी मीन बहादुर विष्ट ने बताया कि आवागमन की सुविधा उन्हीं वाहनों को प्रदान की जाएगी जिसके लिए अधिकारियों द्वारा निर्देश दिया गया है। पेट्रोलियम उत्पाद, एंबुलेंस समेत अन्य आपातकालीन सेवाओं वाले वाहनों को छूट दी जा रही है।
मीन बहादुर विष्ट।