बहराइच। महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज, बहराइच के रेडियोलॉजी विभाग में फर्जी एक्सरे रिपोर्ट बनाने का सिलसिला कुछ इस तरह चला कि एक डॉक्टर ने 323 फर्जी एक्सरे रिपोर्ट जारी कर दीं। इन 323 में एक-दो पीड़ितों ने जब तस्दीक की तब पता चला कि वह डॉक्टर अस्पताल के पुरुष वार्ड से जुड़ा ही नहीं है। ये बातें अस्पताल से जुड़े अफसरों ने एक आरटीआई के जवाब में बताईं। जिन लोगों ने फर्जी एक्सरे रिपोर्ट बनवाई उन लोगों ने अपने बेगुनाह विरोधियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया।
एक पीड़ित के आरटीआई के जवाब में 2015 में तत्कालीन चिकित्साधीक्षक ने तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को भेजे गए पत्र में बताया था कि 2012 में 323 मरीजों का एक्सरे परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई थी। अभिलेखीय जांच से पता चलता है कि जिस डॉक्टर ने यह रिपोर्ट जारी की थी वह जिला चिकित्सालय (पुरुष) में कभी तैनात ही नहीं रहा। आख्या में चिकित्साधीक्षक ने बताया कि उस समय रेडियोलॉजिस्ट के पद पर डॉ. राजीव रंजन तैनात थे। उक्त 323 मरीजों की रिपोर्ट पर डॉ. राजीव रंजन के हस्ताक्षर नहीं हैं। आख्या में यह भी बताया गया कि 323 मरीजों की एक्सरे परीक्षण रिपोर्ट आरोपी एक्सरे टेक्नीशियन की सांठगांठ से बनाई गई थी। उन्होंने अपनी आख्या में बताया कि सभी एक्सरे रिपोर्ट पूर्ण रूप से अवैध हैं।
रेडियोलॉजी विभाग में फर्जी रिपोर्ट बनाने का आलम यह था कि रुपये देने वाले को विभाग के मुलाजिम हस्ताक्षर कर और रिपोर्ट क्रमांक भरकर प्रपत्र दे देते थे। रुपये देने वाला किसी का भी नाम लिखे और कोई भी रिपोर्ट लगाए, रेडियोलॉजी विभाग से कोई लेना-देना नहीं रहता है। रिपोर्ट में एक्सरे क्रमांक सिर्फ असली रहता था। बाकी तिथि, नाम और रिपोर्ट में चोट की स्थिति व्यक्ति खुद भर लेता था। एक्सरे टेक्नीशियन व्यक्ति द्वारा भरे गए उद्धरणों पर फर्जी रेडियोलॉजिस्ट से हस्ताक्षर करवाकर मूल प्रति सरकारी अभिलेखों के रूप में चस्पा कर देता था और छायाप्रति व्यक्ति को दे देता था।
मौके पर तैनात वास्तविक रेडियोलॉजिस्ट की सही रिपोर्ट को फाड़कर फेंक दिया जाता था। सुंदर लाल के प्रकरण पर आईओ ने जो रिपोर्ट लगाई है उससे स्पष्ट होता है कि आईओ ने असली रोडियोलॉजिस्ट से पूछताछ ही नहीं की बल्कि तथाकथित रेडियोलॉजिस्ट से बयान लेकर चार्जशीट लगा दी। इससे यह भी प्रतीत होता है कि विवेचक बयान लेने अस्पताल नहीं पहुंचता था बल्कि घर बैठे फर्जी रेडियोलॉजिस्ट का बयान लगा देता था। अगर वह बयान लेने रेडियोलॉजी विभाग पहुंचता तो सच्चाई कुछ और होती।
बहराइच। मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में चल रहे खेल को तत्काल बंद करने को लेकर सदर विधायक अनुपमा जायसवाल ने डिप्टी सीएम पत्र लिखा है। उन्होंने अखबार की कटिंग संलग्न करते हुए डिप्टी सीएम से तत्काल मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगाने की जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी। माईसिटी में लगातार छप रही खबरों के बीच उन्होंने संवाददाता से बताया कि प्रकरण से अवगत कराने के लिए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि धन लेकर बेगुनाहों को फंसाने का सिलसिला बंद होना चाहिए। मेडिकल कॉलेज में इस तरह का कृत्य कतई बर्दाश्त योग्य नहीं है। कहा कि अगर जल्द कार्रवाई न हुई तो मुख्यमंत्री से मिलकर प्रकरण से अवगत कराऊंगी।
पयागपुर विधायक सुभाष त्रिपाठी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह के एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों मामले हैं। अब भी फर्जी रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया जारी है। मेरे पास हर दूसरे दिन इस तरह के मामले आते हैं कि उनकी रिपोर्ट फर्जी बन गई या फिर फर्जी रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज हो गया। इस प्रकरण के बारे में मैंने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया था। यह कतई बंद होना चाहिए। हम जल्द ही शासन के अफसरों से बात करेंगे ताकि आम जनता को इस फर्जीवाड़े से निजात मिले। कोई बेगुनाह जेल न जाए।
क्राइम ब्रांच आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा रही है। हर हफ्ते बस्ती से बहराइच पहुंच रही है, लेकिन आरोपी हर दिन विभाग में पहुंच रहे हैं और अपना हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह सब होते मेडिकल कॉलेज के हुक्मरान देख भी रहे हैं। विगत चार मई को जब क्राइम ब्रांच की टीम ने छापा मारा था उस दिन भी आरोपियों ने विभाग में आमद दर्ज कराई थी। सोमवार को फिर उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर किया। हालांकि, सीएमएस ने नाम के आगे पेन से गोल कर दिया। सीएमएस ने बताया कि आरोपियों को नोटिस भेजा गया है।