बहराइच। सरकारी क्रय केंद्रों पर बीते एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो गई है, लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी जिले के किसी भी क्रय केंद्र पर अब तक बोहनी नहीं हुई है। वहीं, मंडियों में आढ़तियों की दुकानों पर प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों की आमद न होने का प्रमुख कारण मंडियों में गेहूं का भाव ज्यादा होना है। सरकारी रेट 2015 के मुकाबले मंगलवार को मंडी में गेहूं का भाव 2070 रुपये रहा, वहीं कुछ किसानों ने बताया कि गल्ला व्यापारी गांव में ही 2000 रुपये के भाव में गेहूं खरीद रहे हैं।
गेहूं खरीद के पहले दिन से ही गुलजार होने वाले सरकारी क्रय केंद्रों पर इस बार सन्नाटे की स्थित देखने को मिल रही है। आलम यह है कि जिले में स्थापित 160 गेहूं क्रय केंद्रों पर पांच दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बोहनी नहीं हुई है और एक भी क्विंटल गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है। गेहूं खरीद के लिए मंगलवार को मंडी में स्थापित क्रय केंद्रों की पड़ताल की गई। मंडी में सरकारी क्रय केंद्रों पर पंखा, झरना, मजदूर, बोरा तो मिला, लेकिन गेहूं बिक्री के लिए एक भी किसान मौजूद नहीं मिला। केंद्र प्रभारी देवेन द्विवेदी ने बताया कि अब तक गेहूं बिक्री के लिए एक भी किसान नहीं आया है।
उन्होंने बताया कि 2014 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब खरीद के शुरुआती दिनों में किसान क्रय केंद्र नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के न आने का कारण अभी ज्यादातर फसल न कटना भी है। फखरपुर ब्लॉक के खाद्य विपणन विभाग के क्रय केंद्र पर भी सन्नाटा देखने को मिला। केंद्र प्रभारी विकास गुप्ता को किसानों का इंतजार करते देखा गया। ऐसा ही नजारा खैरीघाट की साधन सहकारी समिति, खैराकला में भी देखने को मिला जहां केंद्र प्रभारी धर्मेंद्र मिश्र तो बैठे नजर आए लेकिन कोई किसान गेहूं बिक्री के लिए नहीं पहुंचा।
मंडी की पड़ताल के दौरान एक ओर जहां सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा रहा तो वहीं दूसरी ओर आढ़तियों की दुकानें गुलजार नजर आईं। आढ़तियों के यहां लगातार गेहूं की तौल होती पाई गई। आढ़ती सोनू सरदार ने बताया कि गेहूं खरीद की शुरुआत से ही मंडी में भाव ज्यादा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को 2070 रुपये के भाव से गेहूं की खरीद की गई है। वहीं, आढ़ती विश्वनाथ साहू ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर 12 प्रतिशत तक नमी ली जा रही है जबकि हम 14 से 15 प्रतिशत तक नमी ले लेते हैं। आढ़ती राजेश तिवारी ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर नकद भुगतान न होने से भी किसान मंडियों का रुख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां किसानों को गेहूं तौल होते ही तत्काल भुगतान कर दिया जाता है।
जानकारों की मानें तो इस बार मंडियों में गेहूं का भाव ज्यादा होने का कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है। मंडी में मौजूद एक व्यापारी ने बताया कि ज्यादातर देश गेहूं का आयात रूस व यूक्रेन से करते थे, लेकिन युद्ध के बाद उत्पन्न हुए विषम परिस्थितियों के कारण कई देश गेहूं आयात के लिए भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। यही कारण है कि विदेशों को गेहूं निर्यात के लिए बड़े व्यापारी गेहूं की जबरदस्त खरीद कर रहे हैं और मंडियों में गेहूं के भाव तेज हैं।
रुपईडीहा। साधन सहकारी समिति रुपईडीहा की पड़ताल की गई तो वहां ताला लटकता मिला। स्थानीय ग्रामीण मोहम्मद दस्तगीर शाह ने बताया कि रुपईडीहा व बाबागंज सरकारी क्रय केंद्र पर ताला लटकने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर कोई किसान गेहूं बिक्री के लिए आता भी है तो उसका स्वागत गेट पर लटकता ताला करता है। इससे भी खरीद प्रभावित हो रही है।
परसा। जरवल ब्लॉक के धवरिया गांव में गेहूं क्रय केंद्र बनाया गया है, लेकिन खरीद शुरू हुए पांच दिन बीत जाने के बाद भी क्रय केंद्र व गोदाम के लिए जगह नहीं मिल पाई है। केंद्र प्रभारी कुंदन सिंह ने बताया कि केंद्र तो बना दिया गया है, लेकिन यहां कोई गोदाम नहीं है। गोदाम के लिए स्थान की तलाश की जा रही है। गोदाम के लिए जगह मिलते ही खरीद शुरू की जाएगी।
रानीपुर। हुजुरपुर ब्लॉक में साधन सहकारी समिति लिमिटेड रमवापुर के गेहूं क्रय केंद्र की दोपहर एक बजे पड़ताल की गई। यहां ताला लटकता नजर आया। केंद्र के सूचना पट्ट पर कांटा मरम्मत कार्य के लिए पयागपुर जाने की सूचना अंकित नजर आई। क्षेत्रीय किसान भगवानदीन से गेहूं बिक्री के बारे में बात की गई तो उन्होंने भाव के चलते बाजार में बिक्री की बात कही। वहीं, किसान अंगद प्रसाद ने कहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बिक्री के लिए लाइन लगानी पड़ती है जबकि गल्ला व्यापारी घर पर खरीद कर तत्काल भुगतान कर देते हैं।