बहराइच। हाईटेक जमाने में कैश लेस सिस्टम लोगों पर भारी पड़ रहा है। रेस्टोरेंट में पिज्जा व मॉल में शॉपिंग लोगों के खाते खाली करवा रही है। गूगल को हथियार बनाकर साइबर अपराधी ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। कहीं कॉल सेंटरों के नंबर पर अपना नंबर डाल रहे हैं तो कही रुपये वापस दिलाने का झांसा देकर अकाउंट खाली कर रहे हैं। ऐसे अपराधी पुलिस के लिए भी सिरदर्द बने हुए हैं। जिले में साइबर अपराध के लगभग 150 से अधिक लोग शिकार हो चुके हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए साइबर सेल लोगों को जागरूक करने का भी काम कर रहा है।
गूगल को गलत तरीके से इस्तेमाल कर साइबर अपराधी लोगों को चूना लगा रहे हैं। पल भर में साइबर अपराधी लोगों के खातों से भारी रकम पार कर रहे हैं। साइबर अपराधी विभिन्न कंपनियों का क्लोन बनाकर उस पर अपना नंबर डाल देते हैं और उसे बार-बार सर्च करते हैं। गूगल पर अधिक सर्च होने के बाद वह नंबर पहले शो करने लगता है। इसके बाद लोग इस पर भरोसा करने लगते हैं तो ये जालसाज उनसे ओटीपी पूछकर उनके खातों से रकम पार कर देते हैं।
जिले में लगभग 150 से अधिक केस ऐसे हैं जो साइबर अपराधी के जाल में फंसकर मेहनत की कमाई गंवा बैठे हैं। साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस भी सक्रिय है। लोगों को जागरूक करने के साथ ही उनके रुपये भी वापस दिलाने का काम कर रही है। 40 लोगों की रकम पुलिस वापस कराने में सफलता पा चुकी है।
कोतवाली देहात क्षेत्र निवासी राघवेंद्र मिश्रा शहर के शॉपिंग मॉल में शॉपिंग करने गए थे। शॉपिंग के दौरान ऑनलाइन पेमेंट किया तो कुछ ज्यादा पैसे कट गए। पैसे वापस पाने के लिए इन्होंने गूगल से कस्टमर केयर का नंबर निकाला जो साइबर अपराधियों द्वारा डाला गया था। पैसे वापस दिलाने का झंासा देकर साइबर अपराधियों ने कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाया और उसके कुछ ही देर बाद खाते से 23 हजार रुपये निकल गए। इन्होंने थाने में शिकायत की है।
कोतवाली देहात क्षेत्र निवासी अभिमन्यु पाठक ने पिज्जा ऑर्डर करने के लिए गूगल से नंबर निकाला। गूगल से जो नंबर मिला उस पर कॉल की तो बुकिंग करने के लिए ओटीपी भेजा गया। ओटीपी बताते ही इनके खाते से कुछ ही देर बाद 34 हजार रुपये गायब हो गए। इन्होंने पुलिस को सूचना दी। काफी प्रयास के बाद साइबर सेल ने 32 हजार रुपये वापस करा दिए गए।
कोतवाली देहात क्षेत्र निवासी संतोष कुमारी ने आधार कार्ड से रुपये निकाले थे। कुछ दिन बाद पीड़ित के मोबाइल पर मेसेज आया कि 29 हजार रुपये और निकल गए हैं। पीड़िता जब दुकानदार के पास गई तो वहां ऐसा होने से इंकार कर दिया गया। पीड़िता ने थाने में तहरीर दी है।
रामगांव थाना क्षेत्र के कुमार शानू ने भी आधार कार्ड से पैसे निकाले थे। कुछ दिन बाद इनके भी खाते से 58 हजार रुपये निकल जाने का मेसेज आया। बैंक जाकर पता किया तो अलग-अलग जगहों से पैसे निकलने की सूचना दी गई। पीड़ित ने भी पैसे वापस पाने के लिए थाने व एसपी को प्रार्थना पत्र दिया है।
साइबर एक्सपर्ट बताते है कि गूगल एक सर्च इंजन है। इस पर साइबर अपराधी कंपनियों का क्लान बनाकर अपना नंबर डाल देते हैं। जब भी कोई गूगल पर कंपनियों के कस्टमर केयर के लिए नंबर सर्च करता है तो इन साइबर अपराधियों का नंबर आ जाता है। उन नंबरों पर बात करने पर साइबर अपराधी ऐनी लॉक या क्विक एसिस नाम के एप को मोबाइल में डाउनलोड करा देते हैं। उसके बाद कॉल कर्ता के मोबाइल का कंट्रोल उनके हाथ में चला जाता है और वे रकम पार कर देते है।
आधार कार्ड से पैसे निकालने के दौरान कई बार दुकानदार सादे कागज पर भी अंगूठा लगवा लेता है। ऐसा अधिकतर मकान या सरकारी योजनाओं का लाभ देने के नाम पर किया जाता है। उसके बाद उसी नाप का नकली अंगूठा चिह्न बनवाकर आधार कार्ड का नंबर डालकर पैसे पार कर देते हैं।
साइबर एक्सपर्ट बताते है कि जब भी किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सर्च करें तो कंपनी की वेबसाइट में ही जाकर निकालें जिससे गूगल पर साइबर अपराधियों के डाले गए फर्जी नंबर से बचा जा सके। अंगूठे का निशान देने में एहतियात बरतनी चाहिए।
साइबर अपराधियों से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रमों में भी लोगों को जानकारियां दी जाती हैं। जिन लोगों का पैसा साइबर अपराधियों ने निकाल लिया है उनको वापस कराने के लिए साइबर सेल की टीमें लगातार काम कर रही हैं। कई केसों में सफलता भी मिली है।
- कुंवर ज्ञानंजय सिंह, एएसपी, नगर बहराइच