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अब फूटा 36 फर्जी नियुक्तियों का भांडा

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बहराइच। महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के प्रबंध तंत्र ने मिलकर 24 वार्ड ब्वॉय व 12 नर्सों की फर्जी नियुक्ति कर उनसे खूब काम लिया और जब वेतन देने की बारी आई तो 13 महीने टरकाते रहे। प्रत्येक फर्जी नियुक्ति में मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों और आउटसोर्सिंग कंपनी ने युवक-युवतियों से मोटी रिश्वतखोरी की। 13 महीने के लंबे इंतजार के बाद जब वार्ड ब्वॉय व नर्सों ने वेतन को लेकर सोमवार को प्राचार्य कार्यालय का घेराव किया तो प्राचार्य ने पूर्व सीएमएस को फर्जी भर्ती का मास्टर माइंड बताते हुए शासन को पत्र भेज दिया।
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एक नवंबर, 2021 की देर रात महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को भेजे पत्र में उन्होंने बताया कि पूर्व सीएमएस डॉ. डीके सिंह और प्रोपराइटर मेसर्स जीत सिक्योरिटीज एंड एचआर ने मिलकर बिना उनको विश्वास में लिए 36 युवक-युवतियों की भर्ती कर ली और लगातार काम लेते रहे। उन्होंने उक्त दोनों को फर्जी नियुक्ति का जिम्मेदार बताते कार्रवाई की मांग की है।
13 महीने से वेतन के लिए भटक रहे 36 वार्ड ब्वॉय और नर्सों की फर्जी नियुक्ति का मामला अब खुल गया है। इस घोटाले के सभी किरदार सामने आ गए हैं। इन बेरोजगारों से नियुक्ति के नाम पर खूब रिश्वतखोरी हुई। इनसे कोरोना के प्रथम और द्वितीय चरण में खूब काम लिया गया। जब मामला गरमाने लगा तो बाहर का रास्ता दिखा गया। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के प्रयासों से 30 अक्तूबर, 2021 को शासन में तैनात अनुसचिव प्रेमशंकर तिवारी ने आउट सोर्सिंग कर्मियों के वेतन भुगतान के आदेश दिए हैं, लेकिन प्राचार्य एके साहनी खुद फंसने के डर से भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
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उधर, सोमवार देर शाम जब जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र के स्तर से मामले को तत्काल निस्तारित करने का आदेश दिया गया तो प्राचार्य ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को इस आशय से पत्र भेजा कि मामले में दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने पूर्व सीएमएस और मेसर्स जीत सिक्योरिटी पर फर्जी भर्ती का ठीकरा फोड़ा। बताते चलें कि इन 36 युवक-युवतियों का वेतन भुगतान अब भी अधर में है। प्राचार्य ने एक आश्वासन पत्र जरूर जारी कर दिया है।
जितनी भी फर्जी नियुक्तियां हुई हैं, सब प्राचार्य एके साहनी की जानकारी में हैं। उन्हीं के आदेश पर यह सब हुआ है। उन्होंने समस्त भर्तियों से जुड़े कागजों सील कर रखे हैं। सभी पर उनके हस्ताक्षर है। पूर्व जिलाधिकारी शंभू कुमार ने तत्कालीन पीसीएस अधिकारी और ट्रेजरी अफसर की संयुक्त कमेटी से इस मामले की जांच कराई थी जिसमें मुझे क्लीन चिट मिली थी। - डीके सिंह, पूर्व सीएमएस, महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज, बहराइच
इन 36 फर्जी नियुक्तियों के जिम्मेदार पूर्व सीएमएस डॉ. डीके सिंह और आउटसोर्सिंग एजेंसी का प्रबंध तंत्र है। मुझे अज्ञानता में रखकर सब किया गया था। युवक-युवतियों की मांग जायज है। आखिर जब इन्होंने काम किया है तो वेतन पाने का भी हक है। 10 कार्य दिवस के अंदर वेतन भुगतान कराऊंगा। निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है। - एके साहनी, प्राचार्य, महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज, बहराइच
मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जाएगी। यह देखवाया जा रहा है कि किन परिस्थतियों में नियुक्ति के बाद भी वेतन नहीं दिया गया। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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डा. एनसी प्रजापति, डीजीएमई
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