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धर्मांतरण या साजिश: अब रिसिया में चली धर्म परिवर्तन की चर्चा

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रिसियामोड़ (बहराइच)। रुपईडीहा में कुछ दिन पूर्व घुमंतू परिवारों के ईसाई बनने का मामला शांत नहीं हुआ था। अब रिसिया में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि का सोशल मीडिया पर अपने व आसपास के गांवों के कुछ परिवारों के धर्मांतरण का वीडियो वायरल हो गया। वायरल वीडियो की पड़ताल कर प्रशासन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं शुक्रवार को हिंदू संगठनों के लोगों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। हिंदू संगठनों ने प्रशासनिक बयान को नकारते हुए कुछ परिवारों के ईसाई बनने की पुष्टि की है। सभी ने इसे एक बड़ी साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री से मामले में सीधे हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई की मांग भी की है।
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रुपईडीहा इलाके में रहने वाले कुछ घुमंतू परिवार के लोगों के ईसाई धर्म अपनाने की बात सामने आई थी। यह मामला अभी चल ही रहा था कि अब रिसिया इलाके के कुछ गांवों में परिवारों के ईसाई धर्म अपनाने का मामला सामने आ गया है। पूर्व ग्राम प्रधान व प्रधान प्रतिनिधि अनिल निषाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उनका दावा है कि गांव में रहने वाले करीब 40 परिवार इसाई मिशनरियों के संपर्क में आकर अपना धर्म बदल चुके हैं। क्षेत्र के सहनवाजपुर, मलुवा भकुरहा, साहेबपुरवा आदि गांवों में बसे मछुआ समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। चमत्कार व प्रलोभन देकर ग्रामीणों को धर्मांतरित किया जा रहा है। हालांकि इस मामले में प्रशासन पूरी तरह से किनारा कस रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक नगर कुंवर ज्ञानंजय सिंह का कहना है कि गांव जाकर मौके की जांच की गई है। 30 से 40 परिवारों के धर्मांतरण की बात पूरी तरह से गलत है।
बहराइच पुलिस इसका खंडन करती है। उधर इसके विपरीत हिंदू संगठनों का दावा है कि एक बहुत बड़ी साजिश के तहत लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आरएसएस के धर्म जागरण विभाग प्रमुख जितेश्वर, विभाग कार्यवाह अंबिका प्रसाद, महामना मालवीय मिशन अवध क्षेत्र के अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव, समाज सुधारक स्वामीदयाल, समाजसेवी डॉ. राधेश्याम गुप्ता आदि शुक्रवार को गांव पहुंचे। धर्म जागरण नेताओं ने पुलिस और प्रशासन द्वारा धर्मांतरण की साजिश का खुलासा न किए जाने पर नाराजगी जताई गई। सभी ने बताया कि ग्रामीणों से संवाद करने पर धर्मांतरित होने की पुष्टि हुई है। इसके साक्ष्य भी सभी के पास हैं। एक षड़यंत्र के तहत पंजाब, चंडीगढ़ को केंद्र बनाकर लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म में शामिल किया जा रहा है। इनके प्रभाव में आकर सैकड़ों लोग हिंदू मठ-मंदिर, पूजा संस्कार और संस्कृति को छोड़ चुके हैं। कथित तौर पर यह सभी धर्मांतरित होने से मुकर रहे हैं। मगर यह एक धर्मांतरण मिशनका हिस्सा है।
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हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों का दावा है कि प्रशासन अगर गंभीरता से जांच करता है तो कई चीजें सामने आ सकती हैं। इसाई मिशनरियों के द्वारा कुछ नव युवकों को बहला-फुसलाकर प्रार्थना सभा कराई जा रही है। वहीं कुछ लोगों को प्रशिक्षित पास्टर भी बनाया जा रहा है।
रिसिया के शहनवाजपुर गांव निवासी बबलू पुत्र पन्नेलाल निषाद का एक पत्र भी वायरल हुआ है। वायरल पत्र में उसका कहना है कि उसके छोटे भाई की पत्नी अनीता ने इसाई धर्म अपना लिया है। हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा घर में नहीं रख रही है। देर रात तक किसी पास्टर से फोन पर बात करती रहती है। अपने परिवार के लोगों को भी वह इसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बना रही है।
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