नानपारा/रुपईडीहा (बहराइच)। भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों व आतंकी योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले लोगों पर शिकंजा कसने के लिए एटीएस सेंटर की स्थापना शीघ्र की जानी है। 26 मई को प्रस्तुत बजट में राज्य सरकार ने इसके लिए हरी झंडी भी दे दी है। मंगलवार को एडीजी एटीएस ने एटीएस सेंटर के लिए अधिग्रहीत भूमि का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने रुपईडीहा में एसएसबी व पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर सीमा सुरक्षा का जायजा भी लिया।
भारत-नेपाल सीमा पर तराई क्षेत्र में बसे जनपद में पूर्व में कई बार विभिन्न संगठनों के आतंकियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पड़ोसी देश नेपाल के साथ खुली सीमा होने से आईएसआई, हिजबुल मुजाहिदीन समेत आतंकी संगठनों के सदस्यों के सीमा पार से आने-जाने के इनपुट भी खुफिया एजेंसियों को मिलते रहे हैं। ऐसे में सीमा क्षेत्र में एटीएस सेंटर की स्थापना की कवायद काफी दिनों से चल रही है।
सीमावर्ती क्षेत्र बाबागंज के ग्राम सुजौली में बीते वर्ष चार जनवरी को जिलाधिकारी द्वारा 0.110 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण एटीएस सेंटर की स्थापना के लिए किया गया था लेकिन उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। 26 मई को प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा एटीएस सेंटर के निर्माण की अनुमति मिलने के बाद एडीजी एटीएस नवीन अरोड़ा ने अधिग्रहीत भूमि का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं। इस दौरान तहसीलदार नानपारा अमर चंद वर्मा, क्षेत्राधिकारी नानपारा जंगबहादुर यादव समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
इसके बाद एडीजी ने रुपईडीहा में 42वीं वाहिनी के कमांडेंट अनिल यादव, एसएसबी निरीक्षक अरुण कुमार व पुलिस क्षेत्राधिकारी नानपारा डॉ. जंग बहादुर यादव व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर सीमा सुरक्षा की जानकारी ली। उन्होंने बैठक के बाद भारत-नेपाल सीमा स्थित नो मेंस लैंड का निरीक्षण भी किया।