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32 लाख लोग बिजली-पानी को तरसे

Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
Bahraich
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बहराइच। जिले में तबाही मचाकर चक्रवाती तूफान हुदहुद का असर मंगलवार रात एक बजे थम गया। वर्षा के साथ आंधी भी रुक गई है। बुधवार सुबह धूप खिलने से मौसम सुहावना दिखा लेकिन 36 घंटे तक बहराइच में तूफान के असर से हर तरफ तबाही पसरी नजर आ रही है। बिजली की लाइनें टूटी पड़ी हैं। जगह-जगह पेड़ गिरे हुए हैं, जिससे जनजीवन अभी भी पटरी पर नहीं आ सका। शहर के आधे हिस्से में बिजली दूसरे दिन भी देर शाम तक गुल रही। वहीं, ग्रामीण अंचलों में भी देर शाम तक विद्युत सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। अभी 32 लाख की आबादी बिजली के अभाव में पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है।
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चक्रवाती तूफान के असर से जिले की बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। तूफान का दौर तो मंगलवार देर रात थम गया लेकिन सोमवार रात से मंगलवार रात तक चली आंधी से जिले के 16 उपकेंद्रों के अंतर्गत 90 से अधिक बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं। हर दो किलोमीटर की दूरी पर विद्युत लाइन भी पेड़ या टहनी गिरने से प्रभावित हुई है। शहर के सिविल लाइंस इलाके में इंदिरा स्टेडियम के सामने यूकेलिप्टस का पेड़ गिरने से 11 हजार वोल्ट और सामान्य सप्लाई की लाइन दोनों एकसाथ धराशायी हुए हैं। वहीं कल्पीपारा, कलेक्ट्रेट क्षेत्र में भी बिजली के तार टूटकर गिरे। बहराइच से विशेश्वरगंज के मध्य 33 हजार और 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन पर 13 स्थानों पर पेड़ गिरने से लाइन क्षतिग्रस्त हुई है। लगभग यही स्थिति नानपारा और कैसरगंज तहसील क्षेत्रों में रही, जिसके चलते सोमवार रात एक बजे से ही बिजली गुल हो गई थी। शहर के आधे हिस्से में मंगलवार रात 10 बजे सप्लाई सुचारू तरीके से शुरू कर दी गई लेकिन आधे हिस्से में अंधेरा ही रहा। बुधवार पूर्वाह्न 11:15 बजे सप्लाई शुरू हो सकी लेकिन ग्रामीण अंचलों में बिजली व्यवस्था अब तक पटरी पर नहीं आई है। फॉल्ट दुरुस्त कर लाइनों को चेक किया जा रहा है। देर रात तक बिजली सप्लाई बहाल होने की संभावना जताई जा रही है।
उपखंड अधिकारी नगर सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि शहर में खंभे और तार टूटने से लगभग चार लाख का नुकसान हुआ है। अधिशासी अभियंता आरिफ अहमद ने बताया कि पूरे जिले में तेज हवाओं से पावर कार्पोरेशन को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। खंभे और तार क्षतिग्रस्त हुए हैं। लगभग 20 लाख के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी उपकेंद्रों के अभियंताओं से क्षति की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद सही तरीके से हुई क्षति की पुष्टि की जा सकेगी।
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