बहराइच (ब्यूरो)। गजाधरपुर गोंदौरा गांव निवासी एक विवाहिता को वर्ष 2011 में ससुरालियों ने जिंदा जला दिया था। इस मामले में पति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को विशेष न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान पति को दोष सिद्ध करार देते हुए 10 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। चचेरे सास और ससुर को दोषमुक्त कर दिया गया है।
रामगांव थाना अंतर्गत सिसैयाचक निवासी शिवकुमार ने अपनी बेटी गुड्डी (20) का विवाह वर्ष 29 अप्रैल 2010 में फखरपुर के गजाधरपुर गोंदौरा निवासी बबलू उर्फ बदलू पुत्र लालबहादुर के साथ किया था। कम दहेज की बात कहकर गुड्डी को ससुराल के लोग प्रताड़ित करते थे। आठ जून 2011 की रात ससुराल के लोगों ने गुड्डी को जिंदा जला दिया था। इलाज के दौरान गुड्डी ने दम तोड़ दिया था। इस मामले में शिवकुमार ने गुड्डी के पति बदलू, चचेरे ससुर पतिराज और उसकी पत्नी के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान शिवकुमार अपनी गवाही से मुकर गया लेकिन विशेष न्यायाधीश उत्कर्ष चतुर्वेदी ने मृतका के मृत्यु पूर्व बयान को संज्ञान में लेते हुए पति बबलू को 10 साल के कठोर कारावास और सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।