जिले के विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत आवेदन किए थे। इसमें कॉलेजों की ओर से संदिग्ध डाटा के संबंध में रिपोर्ट नहीं दिए जाने के कारण इनकी शुल्क भरपाई फंस सकती है। हालांकि अभी करीब तीन दिन का मौका विभाग ने और दिया है। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जिले के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले 13214 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किए थे। इसके बाद कॉलेजों में आवेदन जमा किए गए थे। आवेदन किए जाने के बाद कॉलेजों को उसे ऑनलाइन समाज कल्याण विभाग को अग्रसारित कर दिया गया था।
निदेशालय की ओर से आवेदन पत्रों की जांच की गई। स्क्रूटनी में आठ हजार 724 आवेदन बिल्कुल सही पाए गए, जबकि चार हजार 490 आवेदन पत्र संदिग्ध मिले। इनको कॉलेजों को पुन: भेजा गया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि उसकी प्रति को कॉलेजों को भेज दिया गया है, लेकिन कुछ कॉलेजों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी है, जिससे दिक्कत आ रही हैं।
किसान डिग्री कॉलेज में एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र संदीप शुक्ला ने ऑनलाइन आवेदन किया था। उनके आवेदन फार्म पर सस्पेक्ट लिखा होने के साथ ही कारण में कोर्स के मिसमैच होने का उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि गलती विभाग और कॉलेज की है। ऐसे में उनको किस बात की सजा दी जा रही है, यह बात समझ से परे है। केडीसी के ही रियाज ने बताया कि उनके आवेदन को भी संदिग्ध की श्रेणी में रख दिया गया है। ऐसे में शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी डीके सिंह ने कहा कि कॉलेजों को अंतिम बार मौका दिया गया है। मिसमैच कोर्स और संदिग्ध डाटा के आवेदनों के संबंध में अपनी रिपोर्ट तत्काल समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध करा दें। 11 मार्च के बाद ऐसे आवेदनों को निरस्त कर दिया जाएगा।