रिसियामोड़ (बहराइच)। प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। परियोजना निदेशक की जांच में आवास योजना के 20 लाभार्थियों द्वारा धन लेकर भी आवास न बनवाने का खुलासा हुआ है। घोटाले के खुलासे के बाद बीडीओ चित्तौरा द्वारा सभी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इसमें 17 लाभार्थियों समेत पूर्व ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव शामिल हैं।
चित्तौरा ब्लाक के ग्राम पंचायत मकोलिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 65 आवास आवंटित किये गये थे। सोमवार को आवास निर्माण की जांच करने पहुंचे परियोजना निदेशक अनिल सिंह ने पाया कि 17 आवास निर्मित नहीं हुए हैं। जबकि आवास का धन लाभार्थियों द्वारा आवंटित कर लिया गया है।
परियोजना निदेशक ने बताया कि पूर्व प्रधान नौशाद व उसके एक सहयोगी शमशाद ने ग्रामीणों का आवास बनवाने की बात कही थी, लेकिन आवास निर्माण नहीं कराया गया। घोटाले में पंचायत सचिव अरुण पांडेय की भी संलिप्तता की बात सामने आयी है। जिसके बाद बीडीओ चित्तौरा ने थाना रिसिया में पूर्व ग्राम प्रधान नौशाद, उसके सहयोगी शमशाद, पंचायत सचिव अरुण पांडेय व 17 लाभार्थियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराया है। इसमें लाभार्थी फारुक पुत्र रग्घू, राजू पुत्र श्रीराम, माता प्रसाद, शीला देवी, नाजमा, अय्यूब, मो.शरीफ व मुस्तकीम समेत अन्य लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गई है।
घोटाले में पहले ही निलंबित है पंचायत सचिव
परियोजना निदेशक अनिल सिंह ने बताया कि पंचायत सचिव अरुण पांडेय भ्रष्टाचार के आरोप में पहले ही निलंबित है। उन्होंने बताया कि सचिव अरुण पर मनरेगा योजना में गबन करने का आरोप लगा था। जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री आवास योजना के घोटाले में भी उसका नाम आया है। एफआईआर दर्ज करायी गई है।