बहराइच। नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण घाघरा नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 68 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। महसी, कैसरगंज, नानपारा और मोतीपुर तहसील में हड़कंप की स्थिति है।
121 गांवों में बाढ़ है। ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। प्रशासन के इंतजाम सिर्फ औपचारिकता भर दिख रहे हैं।
हालात ये है कि कोई ट्यूब की नाव बनाकर परिवार को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है तो कुछ लोगों ने बाढ़ से बचने के लिए स्कूलों की छत पर शरण ली है। अफरातफरी की स्थिति है।
बाढ़ से निपटने की तैयारियों के दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज, शारदा बैराज और बनबसा बैराज से 3.50 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। सबसे अधिक तबाही महसी क्षेत्र में है।
यहां पर 70 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नदी किनारे स्थित गांवों के लोग बाढ़ के साथ कटान की भी समस्या से त्रस्त हैं। उनके निकलने के लिए अब तक नावों का इंतजाम भी नहीं हो सका है।
महसी के अटोडर गांव में ढाई से तीन फीट पानी चल रहा है। प्राथमिक व जूनियर विद्यालय डूबा हुआ है। गांव के लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए प्राथमिक विद्यालय की छत पर शरण ली है।
टेंट लगाकर सभी जिंदगी काट रहे हैं। गांव निवासी सत्यनरायन को छत पर भी जगह नहीं मिली तो उसने ट्यूब में हवा भरकर नाव तैयार की। उसी से परिवार के सदस्यों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला।
लगभग यही स्थिति अन्य गांवों में भी है। बाढ़ से निपटने के दावे विफल दिख रहे हैं। ग्रामीण जिंदगी से संघर्ष कर रहे हैं। महसी के 70, कैसरगंज के 35 और मोतीपुर तहसील क्षेत्र के 16 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
इन गांवों की लगभग 1.30 लाख आबादी प्रभावित है। नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट कार्यालय के मुताबिक सुबह से एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी में इजाफा हो रहा है। ऐसे में जलस्तर में और इजाफा होने पर बाढ़ की स्थिति और भयावह होगी।
नाव की व्यवस्था न होने से फंसे ग्रामीण
महसी के भौंरी, फत्तेपुरवा, जोगलापुरवा, घरेहरा नकदिलपुर, मुंशीपुरवा, नगेसरपुरवा, गोलागंज नईबस्ती, कायमपुर, कायमपुर नईबस्ती, मांझा दरिया बुर्द, सेमरही, गेंदालालपुरवा, लोनियनपुरवा, मंगलपुरवा, चमारनपुरवा, चुरईपुरवा में नाव के समुचित इंतजाम नहीं है। ऐसे में गांव के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर नहीं निकल पा रहे हैं। गृहस्थी भी पानी में डूब चुकी है।
अहाता गांव में तीन फीट तक भरा पानी
विकासखंड जरवल का अहाता गांव नदी पार दोआबा में बसा है। यहां पर भी घरों में ढाई से तीन फीट पानी भर गया है। जैसे-तैसे लोग छप्पर और छत पर शरण लिए हुए हैं।
यहां पर अब तक अधिकारी भी पहुंच नहीं सके हैं। नदी का बहाव काफी तेज है और नदी के तट से गांव की दूरी लगभग आठ किलोमीटर है। नाव का ही सहारा है, लेकिन बहाव में नाव नहीं चल पा रही है। अहाता गांव में लगभग 3500 लोग फंसे हुए हैं।
कैंप कर रहीं टीमें, निकाले जा रहे ग्रामीण
बाढ़ प्रभावित महसी, कैसरगंज और मिहींपुरवा क्षेत्र में निरंतर राजस्व टीमें कैंप कर रही हैं। लंगर संचालन के आदेश दिए गए हैं। बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो नाव पहले ही उपलब्ध करा दी गई थी। नाव की और जरूरत होने पर डिमांड के अनुरूप व्यवस्थाएं की जा रही हैं। ग्राम प्रधानों के साथ ही राजस्वकर्मी नजर रख रहे हैं। सभी ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। किसी तो दिक्कत न हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है।
-रामसुरेश वर्मा, एडीएम
आपदा राहत केंद्रों का होगा संचालन
बाढ़ प्रभावित इलाकों में कॉरपोरेट संस्थान, स्वयंसेवी संस्था व अन्य दानदाताओं के सहयोग से जरूरत की चीजों का वितरण योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा।
डीएम ने कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक के दौरान बहराइच ईंट निर्माता समिति, उद्योग व्यापार मंडल, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन, गैर संरकारी संस्था सेव द् चिल्ड्रेन, केयर इंडिया, भारतीय ग्रामोत्थान सेवा विकास संस्थान, भारत विकास परिषद, सम्मान विकास समिति से सहयोग की अपील की।
जिलाधिकारी ने बताया कि तहसील कैसरगंज मे परमहंस डिग्री कॉलेज, नानपारा में ब्लॉक मुख्यालय शिवपुर, महसी में बलभद्र सिंह इंटर कॉलेज एरिया, मिहींपुरवा में गोपिया बैराज पर मॉडल बाढ़ राहत केन्द्र संचालित होंगे।