बहराइच। बेहतर दुग्ध उत्पादन के लिए प्रदेश सरकार गोकुल पुरस्कार से सम्मानित करती है। पर जिले में इस ओर लोगों को प्रोत्साहित करने के प्रयास दम तोड़ रहे हैं।
जिले में पराग डेयरी से जुड़ी 209 दुग्ध समितियों ने दूध का उत्पादन ही बंद कर दिया है। जिले में तीन हजार लीटर प्रतिदिन की आपूर्ति के सापेक्ष पराग को महज 1700 लीटर दूध ही मिल पा रहा है।
बहराइच जनपद में दुग्ध की आपूर्ति को देखते हुए पराग डेयरी की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी। पराग डेयरी की स्थापना के बाद ग्रामीण अंचलों से दूध की आपूर्ति के लिए समितियों का गठन किया गया।
जिले के 14 विकासखंडों में 256 दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया। शुरुआती दौर में समितियों का संचालन तेजी के साथ किया जा रहा था। मगर इसके बाद समितियां सुस्त होती गईं।
वर्तमान समय में जिले की 209 समितियों ने काम करना बंद कर दिया है। अब महज 47 समितियां संचालित हो रही हैं। इन समितियों द्वारा पराग को प्रतिदिन 1700 लीटर दूध की आपूर्ति की जा रही है।
समितियों को जल्द किया जाएगा सक्रिय
पराग डेयरी से जुड़ी समितियों को सक्रिय करने के लिए कार्ययोजना बनाने का काम किया जा रहा है। जल्द ही जिले की सभी समितियां फिर से पहले की तरह काम करने लगेंगी।
जिले में नई समितियों के गठन की कवायद चल रही है। पराग की यूनिट को क्षमता अनुसार दुग्ध आपूर्ति कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-नत्थू सिंह, सामान्य प्रबंधक पराग
गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किरन बनी रोल मॉडल
जिले के विकासखंड शिवपुर अंतर्गत खैरीघाट के बदरका गांव निवासी किरन अवस्थी पत्नी धर्मेंद्र अवस्थी की ओर से दुग्ध उत्पादन समिति का संचालन किया जा रहा है।
इस समिति में वर्तमान में 47 दुग्ध उत्पादक मवेशी पालक जुड़े हुए हैं। इस समिति ने वर्ष 2017-18 में अन्य समितियों के सापेक्ष सर्वाधिक 23 हजार 61 लीटर 600 ग्राम दूध की आपूर्ति पराग को की थी।
इसके बाद किरन का नाम गोकुल पुरस्कार के चयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति ने प्रस्तावित किया है। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने के बाद किरन जिले के मवेशी पालकों के लिए रोल मॉडल बन गई है।
किरन ने बताया कि उनके पास पांच साहीवाल गाय और तीन भैंसें हैं। पति धमेंद्र अवस्थी शिक्षक हैं। पुत्र दुष्यंत और प्रखर बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कार पाने के बाद वे उत्साहित हैं। अगले साल और अधिक उत्पादन कर बहराइच को प्रदेश के टॉप टेन में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।