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World Cancer Day: जागरूकता के अभाव में छोड़ रहे उपचार, दस वर्ष में 200 से अधिक की मौत

Sun, 04 Feb 2024 04:58 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत/बड़ौत

सार

कैंसर वयस्कों के साथ साथ बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। उत्तर प्रदेश के बागपत में भी कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं लेकिन अस्पतालों में न तो कैंसर रोग विशेषज्ञ हैं और न ही कैंसर पीड़ितों का डाटा, आखिर कैंसर से जूझ रहे लोग उपचार कराएं भी तो कैसे कराएं।
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कैंसर के बढ़ते खतरे - फोटो : istock
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में न जाने कितने ही लोग कैंसर की चपेट में हैं। पिछले दस सालों से कैंसर बड़ों के साथ-साथ बच्चों व महिलाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। शहर से देहात तक लगभग हर गांव में कैंसर के मरीज हैं, इसके बावजूद उपचार की बात तो दूर, जनपद में कैंसर रोग विशेषज्ञ तक नही है।

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सुविधाओं के अभाव में कैंसर पीड़ित दूसरे राज्यों व गैर जनपदों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे भी दुखद बात यह है कि आर्थिक तंगी व जागरूकता के अभाव में कैंसर पीड़ित बीच में ही उपचार छोड़ रहे हैं, जिस कारण मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

काल बन रहीं नदियों का प्रदूषित पानी
जिले के लोगों के लिए हिंडन और कृष्णा नदी अब अभिशाप बन गईं हैं। प्रदूषित जल बीमारियां परोस रहा है। अकेले कंडेरा, बुढ़पुर दाहा, निरपुडा, भड़ल और गांगनौली में ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 200 से अधिक है।
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नदियों में फैक्ट्रियों का गंदा पानी बहता है। सहारनपुर और शामली से आने वाले प्रदूषित जल ने जिले में विकट हालात पैदा कर दिए हैं। एक सौ फीट गहराई तक भूजल प्रभावित है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और केडियम की मात्रा अधिक है।

इसलिए बढ़ रहा है कैंसर
जनपद में चलाए जा रहे कैंसर जागरूकता कार्यक्रम के नोडल डाॅक्टर अजेंद्र मलिक ने बताया कि इस क्षेत्र की पानी की जल निगम और अन्य एजेंसियों ने गत चार साल पहले जांच कराई, तो हकीकत खुलकर सामने आई। पानी में ही लैड (सीसा) की मात्रा 0.34 मिलीग्राम/लीटर पाई जा चुकी है।

यह सामान्य से 34 गुणा अधिक है। इसमें क्रोमियम की मात्रा 1.84 मिलीग्राम/लीटर पाई गई है, जो कि सामान्य से 19 गुणा अधिक है। पेयजल में लैड की अधिकता के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा लगातार बना रहता है।

लखनऊ में लिया एक माह का प्रशिक्षण
नोडल अधिकारी डाॅ. अजेन्द्र मलिक ने बताया कि गर्भाशय में कैंसर रोग की पहचान करने के लिए जिला चिकित्सालय में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डाॅ. शिल्पा सरोही ने लखनऊ के किंगर्स जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में एक माह का प्रशिक्षण लिया था।

लगातार उच्चाधिकारियों से बातचीत की जा रही है, ताकि जनपद के कैंसर मरीजों को जनपद में ही उपचार मिल सके। उन्होंने चिंता भी जताई कि लोग जागरूकता के अभाव में कैंसर रोग का उपचार बीच में ही छोड़ रहे हैं। बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
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किससे क्या बीमारी?
लैड: इसकी अधिकता से गुर्दों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एनीमिया, मुंह में जलन, मरोड़, उल्टी, पेट में दर्द, लकवा, मानसिक रोग व खून की कमी की आशंका रहती है।
कैडिमियम: गुर्दों की बीमारी, दिमागी बीमारियां, शरीर में ऐंठन, तनाव, मिचली, उल्टी, पेचिस और कैंसर आदि बीमारियां होती हैं।
क्रोमियम: फेफड़ों का कैंसर, त्वचा एवं नाक की श्लेषिभिक झिल्ली में अल्सर पैदा होने की आशंका रहती है।

जिले में हैं इस प्रकार के कैंसर के मरीज
ब्लड कैंसर, मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, गले का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर आदि हैं।

कैंसर से कैसे बचा जा सकता है
- शराब का सेवन न करें
- रेडिएशन के संपर्क में आने से बचें
- फाइबर युक्त डाइट लें
- धूम्रपान करने से बचें
- डाइट में अधिक फैट न लें
- शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
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