बसौद गांव में कालीन बनाती महिलाएं व कारीगर
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बागपत / अमीनगर सराय। आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले गांव बसौद की महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिए आत्मनिर्भर बन रही है। गांव में 65 स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे है। अधिकांश समूह कालीन, रजाई, गद्दे, पायदान बना रहे है। गांव से सामान तैयार कर सोनीपत, पानीपत, दिल्ली सूरत तक सप्लाई किया जाता है। पुरुषों को भी रोजगार दिया जा रहा है।
गांव में महिला स्वयं सहायता समूह शुरू कराने में गांव के ही ताराचंद गुप्ता की अहम भूमिका रही। उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी को समूह सखी बनवाया और 2017 में पहला स्वयं सहायता समूह बनाया। उनके सहयोग से अब गांव में 65 स्वयं सहायता समूह है। गांव की समूह सखी सुनीता देवी व निर्मला शर्मा ने वर्ष 2017 में गांव में माता चंडी देवी व मंसा देवी समूह का संचालन किया। गांव में सबसे अधिक काम कालीन, रजाई, गद्दे, तकिए और पायदान बनाने का किया जाता है। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गांव की महिलाएं अपने घर पर रहकर गांव के लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए है। गांव सुनीता देवी का कहना है कि स्वयं सहायता समूह बनाने के बाद गांव की महिलाओं को घर पर काम मिला और उनके घर के लोगों को भी काम मिल गया। ताराचंद गुप्ता का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से गांव की महिलाएं सशक्त हुई है। गांव की महिलाएं आगे बढ़कर पुरुषों को काम दे रही है। साबरा का कहना है कि वह कालीन तैयार कर दूसरे जिलों व राज्यों में सप्लाई करती है।
फिलहाल काम बंद
लॉकडाउन होने के कारण फिलहाल कच्चा माल नहीं मिल रहा है। महिलाओें का कहना है कि इस कारण फिलहाल काम बंद है। लॉकडाउन के खुलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
खेती को भी बनाया आय का जरिया
कुछ समूह गांव में उगाही पर खेती लेकर लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध करा रही है। निर्मला देवी गांव में उगाही पर जमीन लेकर सब्जी खेती करती है। उन्होंने अपने परिवार को भी अपने साथ खेती के कार्य में लगा रखा है। फरहा का कहना है कि स्वयं सहायता समूह के सहयोग से उसने दाल सप्लाई का काम शुरू किया था। उसके पति गांव-गांव जाकर दाल की बिक्री करते है।