इसके बाद ठगी करने वाले गिरोह ने ब्लाॅक के सामने कार्यालय खोला। उसके बाद एक-एक ग्रुप की तकरीबन 50 से 60 महिलाओं को कार्यालय पर बुलाया और बैठक के दौरान महिलाओं को चाय-समोसे खिलाकर उन्हें मसालों की पैकिंग करने के नाम पर प्रतिमाह 15 से 16 हजार रुपये कमाने का लालच दिया।
इस दौरान गिरोह के सदस्यों ने प्रत्येक महिला से रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर 1000 से 1500 रुपयों की धनराशि वसूली। फिर तकरीबन 12 लाख से अधिक की ठगी करते हुए फरार हो गए और फोन भी बंद कर लिया। बताया गया कि ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों ने एक समिति बनाई। जिसका नाम बेटी बचाओ जनकल्याण समिति रखा। समिति के द्वारा रजिस्ट्रेशन कराने वाली महिलाओं का एक कार्ड भी बनाया गया। सैकड़ों महिलाओं को कार्ड बनाकर दिए गए। इसी तरह ठगी की गई।
केस नंबर एक-
ठगी का शिकार हुई मेघा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ललिता ने बताया कि उसके ग्रुप में 60 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ठगी करने वाले लोगों ने उन्हें योजना के तहत काम दिलाने की बात कहकर प्रति माह 15 हजार रुपये मानदेय दिलाने का झांसा देकर लगभग डेढ़ लाख रुपये की ठगी की गई है।
केस नंबर दो-
लक्ष्मी समूह से जुड़ी ओमवती ने बताया कि कुछ लोगों ने मकान के नाम पर सरकार से ऋण दिलाने, मसालों की पैकिंग कराने व बेटियों को रोजगार दिलाने के नाम पर उनके समूह की 70 से अधिक महिलाओं से ठगी की है।