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भूसे के दाम बढ़े तो लोगों ने गोवंश को सुपुर्दगी में लेने से खड़े किए हाथ

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गौना गांव स्थित गोशाला - फोटो : BAGHPAT
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- पशुपालन विभाग की ओर से लोगों को दिए गए 715 गोवंश, एक दिन के चारे के दिए जा रहे 30 रुपये
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- भूसे के दाम बढ़ने के कारण पशुपालन विभाग से एक दिन के मिलने वाले 30 रुपये में बढ़ोतरी की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। भूसे के दामों में बढ़ोतरी होने के बाद अब पशु पालकों ने निराश्रित गोवंश को सुपुर्दगी में लेने से हाथ खड़े कर दिए है। अब गोवंश को सुपुर्दगी में लेने वाले गोशालाओं में नहीं पहुंच रहे। पशुपालकों का कहना है कि एक गोवंश के चारे पर 100 रुपये से अधिक खर्च हो जाते है, जबकि शासन से सिर्फ 30 रुपये ही भेजे जा रहे है।
भूसे के दाम बढ़कर इस बार आसमान पर पहुंच गए है। इसने पशुपालकों की परेशानियां बढ़ा दी। पिछले साल 700 रुपये क्विंटल बिकने वाले भूसा इस बार 1700 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक महंगा हो गया है। इस कारण जिले में संचालित 25 गोवंश आश्रय स्थलों, गोशालाओं और वृहद गौ संरक्षण केंद्रों में रखे गए निराश्रित गोवंशों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा गोशालाओं से 715 गोवंश पशुपालकों की सुपुर्दगी में दिए गए है, जिनके भरण पोषण के लिए 30 रुपये रोजाना के हिसाब से दिए जाते है। अब भूसा महंगा होने के बाद गोवंश सुपुर्दगी में लेने वालों की भी चिंता बढ़ गई है। खट्टा प्रहलादपुर गांव निवासी राकेश, ब्रिजेश का कहना है कि भूसा महंगा होने के बाद गोवंश का खर्चा भी बढ़ गया है। पहले 50-60 रुपये में गोवंश के लिए एक दिन में हरे चारे व भूसे की व्यवस्था हो जाती थी, लेकिन अब रोजाना 100 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे है। सुपुर्दगी में लिए गए गोवंश दुधारू भी नहीं है। इस कारण अब समस्या बढ़ गई है। अब शासन को गोवंश के भरण पोषण के लिए दिया जाने वाला खर्चे में बढ़ोतरी करनी चाहिए।
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गोवंश सुपुर्दगी में लेने वालों को 30 रुपये रोजाना के हिसाब से भरण पोषण का खर्चा दिया जाता है। भूसा महंगा होने के बाद एक-दो लोगों ने गोवंश वापस सुपुर्द करने की बात कहीं थी, लेकिन गोवंश वापस नहीं लौटाए। - डा. रमेश चंद्र, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी बागपत।
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