बडौत के मलकपुर गांव में अंशु पहलवान की शादी पर दूल्हन अंशु पहलवान व दूल्हे धर्मेन्द्र यादव को आर्
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शादी का मतलब बैंडबाजा, नाचते बराती, पंडाल में तामझाम और नाते-रिश्तेदारों की ठिठोली। ऐसी शादी का सपना ही हर दूल्हा-दुल्हन देखती है। लेकिन देश में फैले कोरोना वायरस ने सदियों से चली आ रही शादियों की इस परंपरा का ही स्वरूप बदल डाला। अब सैनिटाइजर से बरातियों का स्वागत होता है और माला की जगह मास्क पहनाया जाता है। मलकपुर गांव में रानी लक्ष्मी बाई अवार्ड विजेता महिला मल्ल अंशु पहलवान के यहां पर कुछ अलग ही तरह से शादी की परंपरा निभाई गई। जिसके बारे में दूल्हा और दुल्हन ने कभी सपने में नहीं सोचा होगा।
दूल्हा समेत तीन लोगों की आई बरात
दरअसल मलकपुर गांव के सत्यवीर ङ्क्षसंह की बेटी अंशु पहलवान की शादी लखनऊ निवासी मून्नू उर्फ धर्मेन्द्र यादव पुत्र छतरधारी से तय हुई थी। विवाह की तारीख 5 अप्रैल नियत थी। लॉकडाउन के बीच बरात ले जाना संभव नहीं था। इसलिए शादी टालने की बजाय दूल्हे के पिता छतरधारी ने गत रात्रि ही लखनऊ से दूल्हा धर्मेन्द्र यादव, भाई सुनील व चचेरे भाई राजू को बारात लेकर भेज दिया।
सैनिटाइज करके पहनाया जयमाल
गांव में लडक़ी पक्ष के लोगों ने सभी का स्वागत करने से पहले सैनिटाइज कराया और अगवानी के समय द्वार पर बरातियों को माला पहनाने से पहले मास्क पहनाया। इसके बाद सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए अंशु पहलवान और धर्मेन्द्र यादव ने फेरे लिए। दोनों ने एक-दूसरे को जो जयमाल पहनाई उसे भी पहले सैनिटाइज किया गया। इस पर मजाकी लहजे में दुल्हे के स्वजन बोले एक समय स्वागत में इत्र छिडक़ा जाता था आज हाथों में सैनिटाइजर डाला जा रहा है।
आठ से दस लोगों के बीच पूरे विधि विधान से शादी हुई। जिसमें ग्राम प्रधान कृष्णपाल, खलीफा हरपाल, सामे सिंह, भाई आसु, वीशू, पप्पू, काला, नीटू, माता सविता, बहन आरजू तोमर शामिल रहे। सभी बराती व जनाती कोरोना बचाव के नियमों का पालन करते हुए एक मीटर से ज्यादा दूरी पर मौजूद रहे। पंडित जी ने भी एक मीटर दूर बैठकर मंत्रोच्चार किया। दूल्हे के परिवार और घरातियों के बीच सादगी में विधि-विधान से सारी रस्में पूरी की गईं। बाद में बेटी की विदा कर दी गयी।